हिनौता ग्रामपंचायत में सरकारी योजनाओं की आड़ में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल सामने आया है। ग्राम पंचायत द्वारा मजदूरों के नाम पर मस्टरोल तैयार कर लाखों रुपये की मजदूरी का भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन धरातल पर न तो कोई काम हुआ, न ही मजदूर नजर आए
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से 160 मजदूरों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। योजनाओं का लाभ पात्र गरीबों को नहीं मिल रहा, बल्कि प्रधान और पंचायत का गठजोड़ इसे अपनी जेब भरने का जरिया बना चुका है।
मजदूरों का काम नहीं, लेकिन भुगतान पूरा
गांव के लोगों ने बताया कि जिन योजनाओं पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए, उनका कोई अस्तित्व ही नहीं है। मजदूरी के नाम पर भुगतान हुआ, लेकिन काम के स्थानों पर सन्नाटा पसरा हुआ है।
शिकायतों पर भी नहीं हो रही कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जांच अधिकारी और उच्च पदस्थ जिम्मेदार भी चुप्पी साधे बैठे हैं। इससे गांववालों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मुख्यमंत्री से लगाई न्याय की गुहार
गांववासियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्राम पंचायत हिनौता भ्रष्टाचार की मिसाल बनकर रह जाएगी।
जब कोई काम नहीं हुआ तो भुगतान कैसे हो गया?
क्या अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह संभव था?
और सबसे बड़ा सवाल – क्या शासन-प्रशासन इस भ्रष्टाचार के चक्रव्यूह को तोड़ पाएगा?
अब देखना यह है कि शासन इस मामले को गंभीरता से लेता है या फिर यह भी एक और फाइल बनकर दफ्तरों में दबा दिया जाएगा।
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