-जनपद बस्ती का मूल निवासी व स्तर तीन का चिकित्सा अधिकारी होने के बाद भी सीएमओ द्वारा डा० बृजेश शुक्ला को जिला स्तरीय आरसीएच व सीएमएसडी व एनसीडी का चार्ज
-शासनादेश का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन कर सरकारी खजाने को लूट रहे सीएमओ व डा० बृजेश शुक्ला
-स्तर 3 के चिकित्सा अधिकारी डा0 आर0के0 सिंह की मौजूदगी में स्तर 2 के अभय सिंह को हर्रैया सीएचसी का प्रभार
स्थान : बस्ती , उत्तर प्रदेश
जनपद बस्ती में स्वास्थ्य विभाग के भीतर कथित तौर पर चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर जिला प्रशासन की निष्क्रियता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग में तैनात डा० बृजेश शुक्ला और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा० राजीव निगम की आपसी सांठगांठ के चलते बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हो रही हैं, जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
इसी को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भानू) के जिला उपाध्यक्ष उमेश गोस्वामी ने महामहिम राज्यपाल को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जाँच कराने की माँग की है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि डा० बृजेश शुक्ला, जो स्तर-3 के चिकित्सा अधिकारी हैं और बस्ती जनपद के ही मूल निवासी हैं, नियमों के विपरीत जिला स्तर के महत्वपूर्ण प्रभार संभाल रहे हैं।
शिकायत के अनुसार शासनादेश संख्या 3645/सेक-2-पाँच-2020-आर-14/2020, दिनांक 18 दिसंबर 2020 के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि स्तर-3 के किसी भी चिकित्सा अधिकारी को उसके मूल जनपद में जिला स्तर का प्रभार नहीं दिया जा सकता। इसके बावजूद डा० बृजेश शुक्ला को आरसीएच एवं सीएमएसडी स्टोर जैसे संवेदनशील जिला स्तरीय प्रभार सौंपे गए हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन बताया जा रहा है।
उमेश गोस्वामी का आरोप है कि यह सब मुख्य चिकित्सा अधिकारी की मिलीभगत से किया गया है, जिससे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रशासन की चुप्पी से भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं।
पत्र के माध्यम से राज्यपाल से माँग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराई जाए, दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए तथा भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों का अन्य जनपद में स्थानांतरण करते हुए विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब देखना यह होगा कि राज्य स्तर से इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार पर वास्तव में लगाम लग पाती है या नहीं।













