नई दिल्ली/ब्रसेल्स, 13 सितम्बर।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच चल रही मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) की बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुँच गई है। दोनों पक्षों का लक्ष्य है कि वर्ष 2025 के अंत तक समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाए।
क्यों है समझौता अहम?
भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के लिए बड़े व्यापारिक साझेदार हैं।
- यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है।
- वहीं, भारत यूरोप के लिए तेज़ी से उभरता हुआ बाज़ार माना जाता है।
यह समझौता तैयार होने पर दोनों ओर से व्यापार शुल्क में कमी, मार्केट एक्सेस में आसानी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
बातचीत के प्रमुख मुद्दे
- कृषि उत्पादों पर शुल्क: यूरोपीय संघ चाहता है कि भारत कृषि आयात पर लगने वाले ऊँचे शुल्कों को घटाए।
- सेवा क्षेत्र और आईटी: भारत चाहता है कि भारतीय पेशेवरों और आईटी कंपनियों को यूरोपीय बाज़ार में ज़्यादा अवसर मिले।
- गैर-शुल्क बाधाएँ (Non-Tariff Barriers): दोनों पक्ष मानकों, प्रमाणन और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर चर्चा कर रहे हैं।
आर्थिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता लागू होने पर भारत के निर्यात को मज़बूती मिलेगी, खासकर कपड़ा, दवा, इंजीनियरिंग और आईटी सेवाओं के क्षेत्र में। वहीं यूरोपीय संघ को भारत में ऑटोमोबाइल, वाइन, टेक्नोलॉजी और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए बड़ा बाज़ार मिलेगा।
सरकार का दृष्टिकोण
भारत सरकार का कहना है कि इस समझौते से न केवल व्यापार बढ़ेगा बल्कि यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को भी मज़बूती देगा। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ इस साझेदारी को एशिया में अपनी रणनीतिक उपस्थिति मजबूत करने के रूप में देख रहा है।

आगे की राह
दोनों पक्षों ने संकेत दिए हैं कि अगले कुछ महीनों में टैरिफ रियायतों और सेवा क्षेत्र पर सहमति बन सकती है। यदि सब कुछ तय समय पर होता है तो यह समझौता भारत और यूरोप के बीच अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक करार साबित होगा।















