सारण पीड़िता के पिता काम से लौटकर घर पहुंचे। बेटी की मौत की खबर से उनका रो-रोकर बुरा हाल है। वे कह रहे हैं, “हम गरीब और कमजोर लोग हैं। आज हमारी बेटी मर गई, अब हम घर पहुंच पाए हैं।
कल फिर काम के लिए निकलना पड़ेगा। इतने बड़े घटना के बाद परिवार की सुरक्षा का डर है। वे प्रशासन से न्याय की मांग कर रहे हैं। पिता का दर्द शब्दों में बयान करना आसान नहीं होता। जिस बेटी को उसने अपने कंधों पर खिलाया, सपनों के साथ पाला-पोसा, आज उसी बेटी के लिए उसे दर-दर न्याय की भीख माँगनी पड़ रही है।
यह दृश्य किसी भी संवेदनशील समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक और शर्मनाक है। दुर्भाग्य की बात यह है कि अभी तक प्रशासन की ओर से ठोस और निर्णायक कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
समाज में यह भावना गहरी हो रही है कि मामले को गंभीरता से लेने के बजाय लीपापोती की जा रही है। ऐसे जघन्य अपराध में अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए और उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।












