एटा। कहा जाता है कि माता-पिता बच्चों के लिए प्रेरणा होते हैं, लेकिन यहां तो धर्म के मामले में पुत्र ही प्रेरक बन मिशाल बन गए। भगवान महावीर के प्रति ऐसी लौ जली कि पढ़ाई लिखाई बीच में ही छोड़कर महावीर में रम गए। बेटा में बैराग जागा तो माता-पिता ने भी संत जीवन जीने का निर्णय लिया और गृहस्थ जीवन का त्याग सत्य, अहिंसा की अलख जगाने के लिए जैन संत बन गए।
कुछ इसी तरह की कहानी एटा शहर के डॉक्टर लोकमान्य दास तिराहा स्थित सुंदरलाल स्ट्रीट निवासी मुकुल जैन के इकलौते पुत्र प्रशांत जैन की रही। वर्ष 2009 में एटा आए आचार्य विमर्श सागर महाराज का सानिध्य पाकर अपना संपूर्ण जीवन भगवान महावीर को समर्पित करने का निर्णय ले लिया।
उस समय बीकाम की शिक्षा पूर्ण प्राप्त कर रहे थे। पढ़ाई−लिखाई में काफी मेधावी रहे। एमसीए में प्रवेश तो ले लिया, लेकिन उनका मन पढ़ाई में नहीं लगा। ब्रह्मचारी जीवन अपना लिया। 2014 में इकलौती बहन प्रियंका की शादी दिल्ली में राहुल जैन के साथ हुई। बस इसी के बाद मन पूरी तरह से घर बार छोड़कर निकल गए और 25 नवंबर 2015 को टीकमगढ़ मध्य प्रदेश में आचार्य विमर्श सागर महाराज से मुनि दीक्षा लेकर मुनि विव्रत सागर महाराज बन गए।
जैन संत के रूप में धर्म की प्रवाहना में लग गये। दूसरी ओर पिता मुकुल जैन तथा मां सुमन जैन को इस बात का मलाल नहीं हुआ और वह भी दोनों वैराग्य के मार्ग पर आगे बढ़ने का निश्चय लेकर क्रियाशील हो गए। पिता मुकुल जैन ने 16 नवंबर 2017 को जबलपुर में आचार्य से मुनि दीक्षा ली तो विश्वांक सागर महाराज बनकर जैन धर्म के प्रचारक बन गए।
पुत्र और पिता दोनों के जैन धर्म को समर्पित हो जाने के बाद मां सुमन जैन ने भी जो निर्णय लिया वह परिवार ही नहीं बल्कि एटा जैन समाज के लिए मिसाल बन गया।
उन्होंने भी 3 नवंबर 2019 को दुर्ग छत्तीसगढ़ में आचार्य विमर्श सागर महाराज से क्षुल्लिका दीक्षा ले ली। तभी से वह विप्रांत माताजी के रूप में गृहस्थ जीवन से संत जीवन में शामिल हो गई। पूरा ही परिवार भगवान महावीर के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए गृहस्थ जीवन की सुख सुविधाओं को त्याग कर तप, जप और जैन धर्म के लिए समर्पित है।
फिलहाल तीनों ही मेरठ में आचार्य विमर्श सागर महाराज के संग में धर्म प्रवाहना कर रहे हैं। वैसे तो एटा की माटी में जैन धर्म की महक पहले से है, लेकिन पुत्र के साथ-साथ माता-पिता का बैराग खास है।











