बस्ती के मुंडेरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों और कर्मचारियों के लिए बने आवास जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। इन आवासों में रहना जान जोखिम में डालने जैसा है।
भवन की दीवारें दरक गई हैं और प्लास्टर टूट कर ईंटें दिखाई दे रही हैं। खिड़कियां, दरवाजे और प्रसाधन तक सब टूट चुके हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सक और कर्मचारी रात्रि विश्राम कर मरीजों को 24 घंटे सेवा कैसे दे पाएंगे, यह गंभीर प्रश्न है।
इस स्वास्थ्य केंद्र की नींव तत्कालीन स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर एल.बी. प्रसाद के प्रयास से वर्ष 2008-09 में रखी गई थी। तत्कालीन जिलाधिकारी रोशन जैकब ने भूमि चिह्नित कर निर्माण कार्य शुरू करवाया था। अस्पताल करीब तीन वर्षों में बनकर तैयार हुआ और वर्ष 2015 में इसमें चिकित्सीय कार्य प्रारंभ हो गया था।
भवन के रखरखाव और निर्माण की गुणवत्ता में कमी के कारण 10 वर्षों में ही इसकी स्थिति दयनीय हो गई है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉक्टर राजेश कुमार ने बताया कि इस समस्या के बारे में मुख्य चिकित्साधिकारी से बात हुई है।
उन्होंने बताया कि बजट की कमी के कारण मरम्मत का काम नहीं हो पा रहा है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा है कि फिलहाल कम से कम एक आवास की मरम्मत करवा ली जाए, जिससे चिकित्सकों को रुकने में समस्या न हो। बाकी काम बजट आने पर पूरे करवा दिए जाएंगे।
news xprees live















