अपनी तस्वीरों को पोस्ट करते रहने में दिलचस्पी रखने वाली लड़कियों को सावधान रहने की ज़रूरत है, क्योंकि कोई अपराधी एआई की मदद से उनकी राह में असुरक्षा के कांटे बो सकता है।
हाल ही में असम की एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और मॉडल का एक नकली, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जनित वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उसे आपत्तिजनक हालत में दिखाया गया। यह वीडियो पूरी तरह नकली था, जिसे डीपफेक टूल्स की मदद से तैयार किया गया था। इस वीडियो को बनाने वाला व्यक्ति महिला का जानने वाला ही था। हालांकि, यह कोई अकेला मामला नहीं है। एक अन्य घटना में एक महिला की तस्वीरों को एआई से मॉर्फ करके उसके नाम के नकली सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड कर दिया गया। ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें महिलाओं की तस्वीरों और पहचान से छेड़छाड़ की जा रही है।

ऐेसे होती है चेहरे से छेड़छाड़
स्कैमर्स एआई मॉडल पर आधारित टूल्स की मदद से किसी महिला के चेहरे को किसी अन्य महिला के शरीर पर जोड़ देते हैं।
सैकड़ों तस्वीरों को एआई मॉडल में डालकर उसे प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे वह चेहरे की बारीकियों, जैसे- आंखें, त्वचा, हावभाव को पहचान सके। यह प्रक्रिया कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक चल सकती है। प्रशिक्षण के बाद, स्कैमर्स महिला के चेहरे को किसी आपत्तिजनक वीडियो या सामग्री पर जोड़ते हैं। एडवांस टूल्स के ज़रिए वीडियो इतने वास्तविक लगते हैं कि असली-नकली के बीच पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है।
तैयार की गई तस्वीर या वीडियो को या तो सोशल मीडिया पर वायरल किया जाता है या फिर आपत्तिजनक वेबसाइट्स पर डाला जाता है। कई बार पीड़िता या उसके परिचितों को ये वीडियो भेजकर पैसों की मांग भी की जाती है।
फोटो के अलावा भी हैं कई ख़तरे
एआई का ख़तरा सिर्फ़ डीपफेक और मॉर्फिंग तक सीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल कई तरीक़ों से किया जा रहा है। उद्देश्य- महिलाओं को डराना, उनका शोषण करना, पैसों की मांग करना या बदला लेना आदि हो सकता है।
पहचान की चोरी
एआई टूल्स तस्वीरें, आवाज़ और व्यक्तिगत जानकारी चुराकर नकली प्रोफाइल बना सकते हैं, जिससे पीड़ित को कानूनी या सामाजिक मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
डिजिटल स्टॉकिंग और निगरानी
एआई संचालित ट्रैकिंग टूल्स से महिलाओं की ऑनलाइन गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सकती है।
ऑनलाइन उत्पीड़न
चैटबोट्स या ऑटोमेटेड मैसेजिंग टूल्स का उपयोग कर महिलाओं को आपत्तिजनक, धमकी भरे या अपमानजनक संदेश भेजे जाते हैं। मैसेज अक्सर नकली प्रोफाइल्स के ज़रिए भेजे जाते हैं जिन्हें एआई से ही तैयार किया जाता है।
झूठी जानकारी का प्रसार
महिलाओं के ख़िलाफ़ अफवाहें फैलाने या झूठी ख़बर प्रचारित करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो उनकी सामाजिक छवि को गहरी चोट पहुंचाता है।
एआई को समझें और सावधानी बरतें
प्रोफाइल को निजी रखें…
सोशल मीडिया अकाउंट्स को प्राइवेट रखें। अगर अकाउंट पब्लिक रखना चाहती हैं तो हमेशा कम रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें साझा करें। केवल चेहरा पोस्ट करने से भी बचें। हाई-क्वालिटी तस्वीरें मॉर्फिंग के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं।
सब कुछ साझा न करें…
जन्मतिथि, पता, स्कूल या ऑफिस जैसी व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया पर पोस्ट न करें। तस्वीर या वीडियो पोस्ट करने से पहले अच्छी तरह से जांच लें कि कहीं उसमें निजी जानकारी तो रिकॉर्ड नहीं हुई है।
टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन करें…
अपने सभी सोशल मीडिया खातों पर “टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ को सक्रिय करें ताकि पासवर्ड लीक होने पर भी सुरक्षा बनी रहे।
असली-नकली पहचानना सीखें…
डीपफेक वीडियो में अक्सर चेहरे की हरकत अजीब होती है, पलकें कम झपकती हैं या बैकग्राउंड असमान होता है। कई एआई डिटेक्शन टूल्स मौजूद हैं जिनकी मदद से आप तस्वीरों या वीडियो की सत्यता की जांच कर सकती हैं। यह सबूत के तौर पर आपके काम आ सकता है।
कानूनी सहायता लें
अगर कोई आपकी या आपके परिचित की तस्वीर को एडिट करके ब्लैकमेल करता है तो सायबर क्राइम सेल में शिकायत करें। आप cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कर सकती हैं। डीपफेक, मॉर्फिंग या ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में सायबर कानून के वकील से सलाह ज़रूर लें।
तकनीकी उपाय अपनाएं
- नाम या लोगो जैसे वॉटरमार्क अपने चेहरे या कपड़ों के पास लगाएं ताकि उसे हटाना मुश्किल हो।
- चेहरे पर हल्का फिल्टर या पारदर्शी लेयर लगाएं जिससे एआई टूल्स को चेहरा ट्रैक करने में दिक़्क़त हो।
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