महर्षि दयानन्द सरस्वती की 200वीं जयंती वर्ष के अवसर पर बस्ती में आयोजित वार्षिकोत्सव

बस्ती। महर्षि दयानन्द सरस्वती की 200वीं जयंती वर्ष के अवसर पर स्वामी दयानन्द विद्यालय सुरतीहट्टा बस्ती में आयोजित वार्षिकोत्सव में बच्चों ने आचार्य योगेन्द्र मेधावी और आचार्य प्रदीप सिंह के नेतृत्व में मौलिक गीत, कविता आदि विभिन्न प्रेरक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जिसमें भगतसिंह और महर्षि दयानंद का काशी शास्त्रार्थ नाटक के साथ बच्चों का शौर्य प्रदर्शन देखकर लोग भाव विभोर हो गए। मुख्य अतिथि ऐश्वर्य राज सिंह ने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती ने वेद को सार्वदेशिक व सार्वभौमिक बताते हुए मानवमात्र के कल्याण के सबको वेद पढ़ने व पढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त कराया जिससे समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने में बड़ी सहायता मिली और समाज के उपेक्षित वर्ग को भी सम्मान और स्वाभिमान से जीने का अवसर प्राप्त हुआ।

स्वागत गीत, भजन, लोक गीत प्रस्तुत कर बच्चों ने दर्शकों का मोह लिया मन –

उन्होने शिक्षा का जो आदर्श प्रस्तुत किया वह अनुकरणीय है। कार्यक्रम का शुभारम्भ ईश्वर स्तुति प्रार्थना उपासना से हुआ तत्पश्चात स्वागत गीत, भजन, लोक गीत प्रस्तुत कर बच्चों ने दर्शकों का मन मोह लिया। विशिष्ट अतिथि अशोक सिंह ने कहा कि वास्तव में महर्षि दयानन्द ने सत्य को ग्रहण करने और असत्य को छोड़ने की कसौटी समाज को दी है। वेद को विज्ञान की कसौटी पर खरा बताते हुए उन सन्दर्भोे को भी रखा जिन्हे पहले पौराणिक या काल्पनिक कहा जाता रहा। आज वैदिक गणित खगोल शास्त्र, ज्यातिष शास्त्र विज्ञान के चक्षु के रूप में संसार में प्रकाश प्रवाहमान करा रहा है।


इसके अलावा क्षेत्रीय लोकगीत, रक्तदान पर आधारित नाटक, कव्वाली, लोकनृत्य कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे। इस अवसर पर प्रबन्धक ओम प्रकाश आर्य ने कहा कि आर्य समाज के सिद्धान्तों से प्रभावित होकर क्रान्तिकारियों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इसके अलावा भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, राम प्रसाद बिस्मिल, मंगल पाण्डेय, सावरकर, लाला लाजपत राय जैसे क्रांन्तिकारियों की एक लम्बी फौज तैयार करने में आर्य समाज के विद्यालयों का बड़ा योगदान है। कर्नल के सी मिश्र कहा कि ने विद्यार्थी के हृदय में स्थापित किये गये सकारात्मक विचार उन्हे आगे चलकर आदर्श नागरिक बनने में सहायता करता है और वह अपने देश व धर्म के लिए अपना सर्वस्व अर्पण करने को प्रतिक्षण तैयार रहता है। इस अवसर पर अंकुर वर्मा ने बच्चों के विकास में माताओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्हें बच्चों की संस्कारयुक्त शिक्षा के लिए प्रेरित किया।

प्रधानाध्यापक आदित्य नारायण गिरि ने कहा कि शिक्षक व अभिभावक के सुयक्त प्रयास से बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा दी जा सकती है जिससे आगे चलकर बालक देश का सुयोग्य नागरिक सिद्ध हो सकता है। कार्यक्रम में अतिथियों को ओम चित्र और सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक भेटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सौम्या, प्रिया, तुलसी, लक्ष्मी, नंदिनी, सोनी, नेहा, यामिनी, अदिति, श्रेया, अर्पिता, अमृता, हरिओम, मयंक, अंजलि, अनुदीप, रूही, पलक, दीपांशु, साक्षी, जानवी, राधिका, श्रुति, सृष्टि, नैना, तिलक राज, प्रियांशु, परी, वंदना, वैष्णवी, गुंजन, सुमन, वंशिका, सृष्टि, रजमी, प्रज्वल, राजवीर, श्रेयांश, गौरव, संयम, वंश, आशुतोष, अनमोल, आदित्य, अभिनव, मानवी, लक्ष्मी, अर्पिता, शालिनी, पायल, श्वेता, अभिषेक, यश, तेजस, आदर्श, अभिनव, राजीव, प्रिंस कसेरा, रवि, स्वतंत्र, प्रियांशु, अमरेंद्र, हिमांशु, मानवी, शालिनी, प्रज्ञा, कार्तिकेय, अंशिका चौधरी, श्रेया सहित अनेक बच्चे सम्मिलित रहे। पुरस्कार वितरण के पश्चात कार्यक्रम समाप्त हुआ।
गरुणध्वज पाण्डेय।

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