इन दिनों जिस अन्य टेक्नोलॉजी ने धूम मचा रखी है वह है न्यूरोलिंक की ब्रेन चिप्स. मस्तिष्क में ऑपरेशन कर एक चिप फिट कर दी जाती है और फिर आप जो सोच रहे हैं वह सीधे कंप्यूटर को पता होता है.
लंबी रिसर्च के पश्चात लगभग दो वर्ष पूर्व यह पहली बार एक मनुष्य के मस्तिष्क में आरोपित की गई. युद्ध में पूर्ण रूप से लकवा ग्रस्त एक अमेरिकन के मस्तिष्क में यह चिप लगाई गई. चूंकि यह व्यक्ति पूर्ण रूप से लकवा ग्रस्त है तो हिल डुल तक नहीं सकता. पर अब इस चिप की मदद से दिमाग में सोच कर कंप्यूटर सिग्नल भेज अपने विविध कार्य कर लेता है, फ़ोन हो जाता है, ईमेल कर लेता है, किसी वस्तु की आवश्यकता हो बता देता है, एलेक्सा, टीवी, एसी यह सब अपने आप बंद कर लेता है चला लेता है, समय के साथ व्हील चेयर को भी दिकाग से इंस्ट्रक्शन भेज चला लेगा. खाली समय में कंप्यूटर गेम खेल लेता है. ई बुक पढ़ लेता है. पैरालिसिस ग्रस्त लोगों के लिए यह चिप राम बाण है.

अब इसके नए वर्शन आने लगे हैं. अगले वर्जन में यह यहाँ तक कि जन्मांध लोगों को भी दुनिया दिखा ले जाएगी.
चिप की सफलता से प्रभावित होकर अब इसके कंपीटिटर्स आने लगे हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया ने ऐसी चिप बना दी है जो दिमाग़ की तरंगों को आवाज में बदल देगी. प्रिसिशन न्यूरोसाइंस कंपनी की चिप दिमाग़ में लगाने के लिए दिमाग़ को खोलना नहीं पड़ता बल्कि यह ऊपर से ही फिट हो जाती है. वहीं एलन मस्क की न्यूरोलिंक को टक्कर देने के लिए बिल गेट्स और जेफ बेजोस की कंपनी synchron आ गई है. इसकी चिप दिमाग़ में फिट करने की जगह रक्त धमनियों में फिट हो कर वाहन से इंस्ट्रक्शन ले लेती है. यह तो ब्लूटूथ से आईफ़ोन से भी कनेक्ट हो जाती है. कार्नेज मेलोन यूनिवर्सिटी की चिप के लिए तो सर्जरी भी नहीं करनी पड़ती बस एक टोपी पहन लो और टोपी में लगी चिप दिमाग़ से सिग्नल लेकर सारा कार्य कर लेती है.

आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में अनंत संभावनायें हैं. अभी तो इसका प्रयोग बीमार / दिव्यांग लोगों के इलाज हेतु उपयोग हो रहा है भविष्य में कोई बड़ी बात नहीं कि घर में अलग अलग हैट हों, आज मैच देखने जा रहे हैं तो मैच वाली हैट पहन ली, दिमाग़ को खेल संबंधित सारी जानकारी रियल टाइम में कंप्यूटर से. प्रोग्रामिंग करना हो तो प्रोग्रामिंग हैट.
पिछले दस वर्षों में टेक्नोलॉजी एकदम बदल गई है. दुनिया बदल रही है.















