रिलेशनशिप एडवाइज- ‘औरतों को नहीं, मर्दों को बचाओ’:पति का ये कहना मुझे चुभ गया, जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा, वही मिसोजिनिस्ट निकला

सवाल: मैं 32 साल की हूं और दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में काम करती हूं। मेरी शादी को 5 साल हो चुके हैं और अब तक हमारा रिश्ता बहुत प्यारा और समझदारी भरा रहा है। मेरे पति बहुत केयरिंग हैं, लेकिन हाल ही में कुछ ऐसा हुआ, जिसने मुझे अंदर तक हिला दिया। एक दिन उनके कुछ दोस्त घर आए थे। शराब पीने के दौरान बातचीत में मेरे पति और उनके दोस्तों ने कहा कि ‘आजकल महिलाएं ही समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई हैं। अब औरतों को नहीं, मर्दों को औरतों से बचाने की जरूरत है।’ पिछले दिनों कुछ ऐसी खबरें आई थीं, जिसमें महिलाओं ने अपने पतियों की हत्या कर दी। लेकिन ऐसी चंद घटनाओं के कारण ऐसे नतीजे निकालना खतरनाक है। अपने पति के मुंह से ऐसी बातें सुनकर मुझे बहुत दुख हुआ। जिस इंसान के साथ मैं सबसे सुरक्षित महसूस करती थी, वह भी इतनी सतही सोच (स्त्री द्वेषी, मिसोजिनिस्ट) रख सकता है, यह बात मुझे चुभ गई। अब मेरे मन में कई सवाल उठ रहे हैं- क्या मैं इस बात को ज्यादा तूल दे रही हूं? क्या मुझे उनसे बात करनी चाहिए? क्या हमारा रिश्ता कमजोर हो रहा है? मैं इस घुटन को कैसे हैंडल करूं?

एक्सपर्ट: अदिति सक्सेना, काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट, भोपाल

जवाब: आपकी भावनाएं और आपका दुख बिल्कुल वाजिब है। जब हम किसी के साथ रिश्ते में होते हैं, तो हम सिर्फ उनके साथ वक्त नहीं बिताते, बल्कि उनकी सोच, उनके नजरिए और उनके मूल्यों के साथ भी जुड़ते हैं। अगर वही इंसान ऐसा कुछ कह दे जो आपके विश्वास को हिलाए, तो आपका आहत होना स्वाभाविक है। यह सिर्फ एक टिप्पणी नहीं थी, बल्कि यह उन गहरी सामाजिक मान्यताओं का हिस्सा है, जिसके कारण उनके मन में महिलाओं को लेकर गलत धारणाएं हैं। आइए, इस स्थिति को समझने और इससे निपटने के लिए एक-एक स्टेप देखते हैं।

क्या आप ओवररिएक्ट कर रही हैं?

नहीं, आप बिल्कुल भी ओवररिएक्ट नहीं कर रही हैं। आपकी यह प्रतिक्रिया एक संवेदनशील और जागरूक इंसान की है। जब आपका जीवनसाथी ऐसी बात कहता है जो आपके मूल्यों, आपकी पहचान या आपके लिंग को लेकर सतही हो, तो यह स्वाभाविक है कि आप असुरक्षित और आहत महसूस करें। यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि आपके रिश्ते की उस नींव को छूने वाली बात है, जो आपसी सम्मान और समझ पर टिकी थी।

आपके मन में घुटन इसलिए हो रही है, क्योंकि आप अपने पति को न केवल अपने पार्टनर के रूप में देखती हैं, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में भी, जो आपको समझता है और समाज में बराबरी की सोच रखता है। उनका यह कमेंट उस विश्वास को चुनौती देता है।

क्या इस बारे में पति से बात करनी चाहिए?

हां, बिल्कुल बात करनी चाहिए। लेकिन यह बातचीत गुस्से, आरोप या बहस के मूड में नहीं, बल्कि शांत और खुले मन से होनी चाहिए। रिश्तों में संवाद सबसे बड़ा पुल है, जो दूरियां मिटा सकता है। अगर आप इस मुद्दे को दबा देंगी तो यह घुटन आपके मन में और बढ़ेगी और हो सकता है कि यह आपके रिश्ते में और गलतफहमियां पैदा करे।

बात शुरू करने का सबसे अच्छा तरीका है अपनी भावनाओं को सामने रखना। आप कह सकती हैं-

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उस दिन जब आपने और आपके दोस्तों ने महिलाओं को लेकर कहा कि उनसे मर्दों को खतरा है, मुझे बहुत दुख हुआ। मैं जानना चाहती हूं कि आप ऐसा क्यों सोचते हो। क्या हम इस बारे में खुलकर बात कर सकते हैं?QuoteImage

इस तरह की शुरुआत से आपकी बात न तो आक्रामक लगेगी, न ही यह आपके पति को डिफेंसिव बनाएगी। यह संवाद की एक खिड़की खोलेगी, जहां आप दोनों एक-दूसरे को समझ सकते हैं।

इस स्थिति से कैसे निपटें?

इस घुटन और उलझन से बाहर आने के लिए आपको भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर काम करना होगा। यह प्रक्रिया आसान नहीं होगी, लेकिन यह आपके रिश्ते को और गहरा और मजबूत बना सकती है। ये कुछ स्टेप्स आप ले सकती हैं-

अपनी भावनाओं को स्वीकार करें

आपके लिए यह जरूरी है कि आप अपने दुख और आहत हुई भावनाओं को दबाएं नहीं। अपनी भावनाओं को कागज-पेन लेकर लिखें, किसी करीबी दोस्त से शेयर करें या किसी डायरी में अपनी बातें नोट करें। इससे आपका मन हल्का होगा।

शांत मन से बातचीत करें

अपने पति से बात करने के लिए सही समय और माहौल चुनें। शराब के नशे में कही गई बात को बहाना न बनाएं, क्योंकि नशे में अक्सर वही बातें बाहर आती हैं जो मन में कहीं दबी होती हैं। लेकिन बातचीत हमेशा शांत और सम्मानजनक होनी चाहिए।

उनके नजरिए को समझें

यह भी हो सकता है कि आपके पति ने वह बात आवेश में कही हो या दोस्तों के बीच माहौल बनाने के लिए। उनसे पूछें कि क्या वे वाकई ऐसा मानते हैं? उनकी सोच के पीछे की वजह जानने की कोशिश करें। शायद यह उनकी अपनी सोच न हो, बल्कि समाज का असर हो। अगर उसे अपनी कही बात पर अफसोस है और वह इस गलती को सुधारना चाहता है तो उसकी मदद करें।

प्रोफेशनल मदद लें

अगर बातचीत से बात न बने या आपको लगे कि यह मुद्दा आपके रिश्ते को और प्रभावित कर रहा है, तो कपल थेरेपी या रिलेशनशिप काउंसलिंग लेने से न हिचकिचाएं। एक तटस्थ विशेषज्ञ आप दोनों की बात को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकता है।

रिश्ते की शुरुआत याद करें

आप दोनों ने यह रिश्ता प्यार, सम्मान और बराबरी के आधार पर बनाया था। उस नींव को फिर से मजबूत करने की कोशिश करें। अपने पति को बताएं कि आप उनके साथ इसलिए हैं, क्योंकि आप उनकी सोच और मूल्यों को महत्व देती हैं। अगर उनकी सोच में बदलाव की जरूरत है, तो उसे प्यार और समझदारी से लाने की कोशिश करें।

आखिरी बात

आपका सवाल सिर्फ आपके और आपके पति के रिश्ते का नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक मुद्दे का हिस्सा है। आज भी समाज में जेंडर को लेकर गलत धारणाएं मौजूद हैं और ये धारणाएं कभी-कभी हमारे सबसे करीबी रिश्तों में भी झलकती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आपका रिश्ता कमजोर है। यह एक मौका है, आपके और आपके पति के लिए कि आप दोनों एक-दूसरे को और बेहतर तरीके से समझें और अपने रिश्ते को और मजबूत करें।

अपने दिल की सुनें। आपका प्यार और आपका आत्मसम्मान दोनों ही कीमती हैं। इन्हें बचाए रखें और अपने रिश्ते को उस नींव पर फिर से बनाएं, जो आप दोनों ने मिलकर चुनी थी।

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Bindesh Yadav
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I am an experienced Android and web developer with a proven track record of building robust and user-friendly applications for organizations, schools, industries, and commercial use. I specialize in creating dynamic and responsive websites as well as scalable Android apps tailored to specific business needs. I hold a Master of Computer Applications (MCA) from (IGNOU), and a Bachelor of Science (Honours) in CS fromDU I strongly believe in growth through learning and resilience. "Stop worrying about what you've lost. Start focusing on what you've gained."

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