भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर आर्य समाज बस्ती में विशेष यज्ञ, ‘जल-जंगल-जमीन’ के संरक्षण का संकल्प

चमत्कार नहीं विज्ञान है सत्य, पाखंड और ढोंग से बचें लोग: ओम प्रकाश आर्य कैल्शियम कार्बाइड और पानी की रासायनिक क्रिया से दीपक जलाकर ढोंगियों की खोली पोल

बस्ती, 9 जून।
जल, जंगल और जमीन के अधिकार के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि के अवसर पर आर्य समाज, नई बाजार, बस्ती में एक विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात उपस्थित जनसमूह ने भगवान बिरसा मुंडा के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


इस अवसर पर आर्य समाज नई बाजार, बस्ती के प्रधान ओम प्रकाश आर्य ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा जी ने अन्याय, अत्याचार और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाकर जल, जंगल और जमीन की रक्षा हेतु ‘उलगुलान’ (महाविद्रोह) का आह्वान किया था। उनका संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने समाज को रूढ़ियों से बाहर निकाला और प्रकृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया।”


प्रधान ओम प्रकाश आर्य ने समाज में फैले अंधविश्वास पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि प्रकृति के नियम अपरिवर्तनशील हैं। जब लोग प्रकृति के किसी नियम को समझ नहीं पाते, तो उसे ‘चमत्कार’ मान लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनुष्य ने प्रकृति के जिन नियमों को समझा और परखा, आगे चलकर उसे ही ‘विज्ञान’ कहा गया। रेडियो, टीवी, इंटरनेट, कंप्यूटर और विमान किसी चमत्कार से कम नहीं हैं, लेकिन यह विज्ञान है, जिसका ज्ञान सर्वप्रथम वेदों से मिला है।


ईश्वर अपने नियम नहीं बदलता: प्रकृति के नियम (ऋत) सत्य, नित्य और ईश्वरकृत हैं। ईश्वर सर्वज्ञ है, इसलिए उसके बनाए नियम अटल हैं। यदि प्राकृतिक नियम बदलने लगें तो सृष्टि की व्यवस्था डांवाडोल हो जाएगी। इसलिए तथाकथित चमत्कारों पर केवल पाखंडी और मानसिक रूप से कमजोर लोग ही विश्वास करते हैं।
केमिकल रिएक्शन को ‘चमत्कार’ बताकर जनता को लूटते हैं ढोंगी
श्री आर्य ने अंधविश्वास की पोल खोलने के लिए एक वैज्ञानिक उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पानी से दीया या लैंप जलाने के पीछे कोई दैवीय शक्ति नहीं, बल्कि रसायन विज्ञान होता है।


वैज्ञानिक तथ्य: “दीये के नीचे कैल्शियम कार्बाइड के कुछ टुकड़े डाल दिए जाते हैं। जब इसमें पानी डाला जाता है, तो रासायनिक क्रिया के कारण एसिटिलीन गैस उत्पन्न होती है, जो अत्यंत तेज चमक के साथ जलती है। वर्ष 1918 में मुस्लिम फकीर साईं बाबा भी इसी तरह के वैज्ञानिक प्रयोगों को चमत्कार बताकर भक्तों को चकित करते थे। आज भी कई ढोंगी ऐसे ही हथकंडे अपनाकर जनता को ठग रहे हैं।”


आर्य समाज प्रधान ने जनता से अपील की कि वे ऐसे पाखंडियों और ढोंगियों के भ्रम जाल से दूर रहें। भगवान बिरसा मुंडा के जीवन से प्रेरणा लेकर अंधविश्वास को मिटाएं और अपनी प्रकृति, पर्यावरण तथा जल-जंगल-जमीन को बचाने में अपना सक्रिय योगदान दें।
गरुण ध्वज पाण्डेय
आर्य समाज, नई बाजार, बस्ती।

Bindesh Yadav
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