भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 टीकाकरण के बाद होने वाले गंभीर दुष्प्रभावों (AEFI – Adverse Events Following Immunisation) को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए केन्द्र सरकार से नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी बनाने पर विचार करने को कहा है।
यह टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आई, जिनमें दावा किया गया था कि कोविड-19 वैक्सीन के बाद कुछ लोगों की मौत या गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हुईं। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के मुआवजा दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है, लेकिन दुर्लभ मामलों में होने वाले गंभीर साइड इफेक्ट्स के लिए एक मानवीय और पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए।
क्या है ‘नो-फॉल्ट कम्पनसेशन’?
इस नीति के तहत:
- पीड़ित को मुआवजा पाने के लिए किसी की गलती साबित करने की जरूरत नहीं होती
- प्रक्रिया तेज और सरल होती है
- कई देशों में यह मॉडल पहले से लागू है
सोशल मीडिया पर वायरल दावों की सच्चाई:
सोशल मीडिया पर एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह दावा किया जा रहा है कि कोविड-19 वैक्सीन के बाद कैंसर के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। वायरल पोस्ट में निम्नलिखित आंकड़े बताए जा रहे हैं:
- कुल कैंसर मामलों में 27% वृद्धि
- फेफड़ों (Lung) के कैंसर में 53% वृद्धि
- प्रोस्टेट कैंसर में 69% वृद्धि
- थायरॉयड कैंसर में 35% वृद्धि
- गैस्ट्रिक (पेट) कैंसर में 34% वृद्धि
- कोलोरेक्टल कैंसर में 28% वृद्धि
- स्तन (Breast) कैंसर में 20% वृद्धि
सच्चाई क्या है? (Fact Check)
- इन आंकड़ों को लेकर कोई वैश्विक वैज्ञानिक सहमति (Scientific Consensus) नहीं है
- अभी तक WHO, ICMR या अन्य प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों ने ऐसा कोई निष्कर्ष आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया है
- विशेषज्ञों का कहना है कि:
- कैंसर बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं (लाइफस्टाइल, स्क्रीनिंग बढ़ना, देरी से डायग्नोसिस आदि)
- किसी एक स्टडी के आधार पर सीधा निष्कर्ष निकालना भ्रामक हो सकता है
डॉक्टरों की सलाह
- बिना पुष्टि के ऐसे आंकड़ों से डरने की जरूरत नहीं है
- किसी भी स्वास्थ्य समस्या पर डॉक्टर से ही सलाह लें
- सोशल मीडिया के दावों को तथ्यों के साथ जांचना जरूरी है
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
- किसी भी स्वास्थ्य समस्या पर स्वयं इलाज या अफवाहों पर भरोसा न करें
- यदि कोई लक्षण दिखे, तो पंजीकृत डॉक्टर से सलाह लें
- वैक्सीन से जुड़े जोखिम बहुत दुर्लभ हैं, जबकि फायदे कहीं ज्यादा हैं
निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम पीड़ितों के अधिकारों की दिशा में अहम माना जा रहा है।
हालांकि, वैक्सीन को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारियों से सावधान रहना भी उतना ही जरूरी है।















