चंडीगढ़। शहर के कई एरिया में सप्लाई हो रहा पानी पीने लायक नहीं, जिससे लोग जान गंवा रहे हैं। मौलीजागरां में दो दिन पहले ही आठ वर्षीय बच्ची श्रेया की मौत हुई थी। स्वजन का कहना था की दूषित पानी पीने से श्रेया की हालत बिगड़ी थी। यहीं पर रहने वाली अब एक और बच्ची की भी हालत बिगड़ गई है।
वह पीजीआई के आईसीयू में भर्ती और कोमा में चली गई है। बच्ची के स्वजन अमर भारती ने बताया कि गंदा पानी पीने से बेटी ने पेट दर्द की शिकायत की थी। धीरे-धीरे हालत बिगड़ती चली गई। इससे नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का कहना है कि निगम के कर्मचारी घर-घर जाकर यह लिखवाने में लगे हैं कि उनके यहां साफ पानी की सप्लाई हो रही है और इसके लिए सैंपल भी लिए जा रहे हैं। केवल एक दिन के सैंपल से यह कैसे तय किया जा सकता है कि नियमित रूप से साफ पानी की आपूर्ति हो रही है।
आरोप यहां तक लग रहे हैं कि जिस आठ वर्ष की बच्ची की मौत गंदे पानी से हुई, उसके पिता से भी यह फाॅर्म भरवाने निगम की टीम पहुंची थी। साइन कराने की यह प्रक्रिया गंदे पानी की वास्तविक स्थिति को दबाने का प्रयास है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
श्रेया के पिता सूरज का आरोप है कि उनकी बेटी की पीलिया से मौत हो चुकी है। दूषित पानी की सप्लाई से ही बच्ची की तबीयत बिगड़ी थी। इसके बावजूद अब दबाव बनाकर साइन कराए जा रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। विजय यादव ने आरोप लगाया कि मौलीजागरां में सीवर लाइन अक्सर चोक रहती है और कई बार सीवर व पीने के पानी की लाइनें आपस में संपर्क में आ जाती हैं।
इसके बावजूद प्रशासन इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहा है। श्रेया की मौत के बाद मेयर सौरभ जोशी ने स्वच्छता और पेयजल से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर तत्काल निवारक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने यह भी बताया कि सेक्टर 49 और धनास जैसे अन्य क्षेत्रों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं, जो यह संकेत देती हैं कि कमजोर इलाकों में स्वच्छता और जल आपूर्ति ढांचे की व्यापक समीक्षा की आवश्यकता है।














