चंडीगढ़। हरियाणा में भूमिगत जल के सुधार के लिए राज्य सरकार अब पानी के टैंकों का तल (बेसमेंट) सीमेंट रेनफोर्सड सीमेंट कंकरीट (आरसीसी) से बनवाएगी।
राज्य में करीब ढ़ाई सौ वाटर टैंक ऐसे चिन्हित किये गए हैं, जिनके तल ईटों से बने हुए हैं, लेकिन उनमें पानी रिसने की वजह से वह खराब हो रहा है। यह खराब पानी लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रहा है।
हरियाणा के जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि आरसीसी का तल बनने के बाद भूमिगत जल के रिसाव की समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा।
रियाणा के जनस्वास्थ्य विभाग की तकनीकी टीम की जांच में पाया गया कि कई टैंक काफी पुराने हैं और उनका बेस (तला) ईंटों का बना हुआ है। इसी कारण भूमिगत पानी पेयजल में शामिल हो रहा है।
अब राज्य में इन टैंकों का बेस आरसीसी का बनाने के लिए जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग इस पर काम कर रहा है, जिसे बजट में शामिल किया जा सकता है।
प्रदेश में सेम (जलभराव और खारी मिट्टी) की समस्या मुख्यरूप से दक्षिणी और मध्य जिलों में है। इनमें रोहतक, झज्जर, सोनीपत, भिवानी, जींद, हिसार, चरखी दादरी और फतेहाबाद जिले प्रमुख हैं।
सिरसा के कुछ हिस्सों में भी यह दिक्कत है। रोहतक में 61.47%, झज्जर में 40.7% और सोनीपत में 32.95% जमीन प्रभावित है। हरियाणा में नहरों का जाल बिछा हुआ है। 1995 में आई बाढ़ के बाद सेम की समस्या ज्यादा बढ़ी। नहरों के विस्तार के बाद भी यह समस्या बढ़ती गई।
बाढ़ के बाद कुछ जिलों में भूमिगत पानी ऊपर आ गया। हरियाणा के कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि पहले टैंकों का तला ईंटों का बनाया जाता था, अब इसे आरसीसी का बनाया जाएगा, जिससे नीचे से पानी का रिसाव नहीं होगा।














