–शिकायती पत्रों को रद्दी टोकरी में डाल हमेशा वसूली की जुगत में लगा रहता है महकमा
–धीरे धीरे कारनामा ही बन रहा बिजली विभाग का पहचान
बस्ती संवाददाता - आए दिन अपने ऊलजलूल विभागीय कारनामों व घटिया स्तर के नागरिक सेवाओं के कारण आमचर्चा में रहने वाला बिजली महकमा कहने को तो अपने उपभोक्ताओं को ऊर्जा से सरोबार करता है। लेकिन फर्जी बिलिंग, डबल बिलिंग, गलत मीटर रीडिंग, असमय सर्किट ब्रेकर यानि ट्रिप, पीक आवर में ब्लैक आउट जैसी बदहाल शुश्रूषा ने उपभोक्ता वर्ग के एक बड़े हिस्से को अपने प्रति गहरे विमुखता में धकेल दिया है।विभाग यदि बारीकी से सर्वे कराकर फीडबैक ले तो आंकड़ा निश्चित रूप से चौंकने वाला ही आयेगा।
फिलहाल इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए एक और चौंकाऊ मामला सामने आया है, मिली जानकारी के अनुसार - कप्तानगंज बाजार में घरेलू श्रेणी का एक विद्युत कनेक्शन एक व्यक्ति के नाम से जारी था। जिसका कनेक्शन संख्या - 751608775701 है। विद्युत बिल मूल्य 18009.OO ( अठारह हजार नौ ) रूपये के बकाए के कारण विद्युत विभाग ने उपरोक्त कनेक्शन की विद्युत सप्लाई नोटिस संख्या 2158 प्रपत्र - 1 दिनांक 8 मार्च 2018 जारी करते हुए काट दिया।
इसी दौरान कनेक्शन धारक दिनांक 27 मार्च 2018 को स्वर्गवासी हो गए ।कनेक्शन धारक की मृत्यु उपरान्त उनके भाई ने दिनांक 18/12 /2018 को संपूर्ण समाधान दिवस व दिनांक 12/O3 /2019 को लिखित शिकायती पत्र देकर अपने मृतक भाई के नाम से जारी विद्युत कनेक्शन संख्या - 751608775701 को स्थायी रूप से विच्छेदन की मांग किया था जिस पर विभाग ने अद्यतन कोई कार्यवाही नहीं किया बल्कि प्रार्थना पत्र को या तो गायब कर दिया या फिर रद्दी की टोकरी में डालकर बिना विद्युत उपभोग के लगातार बिलिंग करते हुए लाखों का बिल भेजकर आवेदक का उत्पीड़न जारी रखा है।
कनेक्शन धारक की मृत्यु के बाद इनके वैधानिक वारिसान द्वारा विद्युत विभाग को कनेक्शन संयोजन सम्बन्धी न तो कोई प्रार्थना पत्र दिया गया न ही कनेक्शन जोड़ा गया फिर भी कनेक्शन धारक के वारिसान को लाखों का वसूली नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है । कप्तानगंज का यह प्रकरण विद्युत विभाग के लिए केवल बानगी मात्र है यदि गहनता से नजर दौड़ाएं तो बिजली विभाग की इस प्रकार की बीमारी बहुसंख्यक उपभोक्ता घरों में मिलेगी। बिजली विभाग के लिए शिकायती पत्र मायने नहीं रखता यहाँ तो बिजली विभाग पंजीकृत शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डालकर हमेशा वसूली की जुगत में लगा रहता है। फ़िलहाल अब यह देखना मात्र रह गया है कि विभाग इस प्रकरण को हजम करने में कौन सा गुल खिलाता है।













