अक्षय कुमार यानी एक ऐसा नाम, जिसने अपनी मेहनत के दम पर बॉलीवुड में बहुत ऊंचा मुकाम हासिल किया। साधारण परिवार में जन्मे अक्षय ने कभी शेफ का काम किया, कभी वेटर बने, कभी बच्चों को मार्शल आर्ट्स सिखाए और कभी लाइटमैन भी बने।
फिर मॉडलिंग की और जब फिल्मों में आए, तो अपने एक्शन से लोगों का दिल जीता। कॉमेडी में आए तो अपनी डायलॉग डिलीवरी से सबको खूब हंसाया। साथ ही उन्होंने कई अलग-अलग तरह के रोल निभाए। 1990 के दशक में करियर की शुरुआत करने वाले अक्षय कुमार की गिनती आज भी बॉलीवुड के टॉप अभिनेताओं में होती है।
अक्षय कुमार का असली नाम राजीव भाटिया है, उनका जन्म 9 सितंबर 1967 को हुआ था। उनके पिता हरि ओम भाटिया आर्मी ऑफिसर थे और मां अरुणा भाटिया गृहिणी थीं। बचपन में ही उनके पिता के ट्रांसफर से परिवार दिल्ली से मुंबई आ गया। छुट्टियों में वे अक्सर चांदनी चौक जाते थे। अक्षय बचपन से ही खेल-कूद में बहुत रुचि रखते थे।

अक्षय के पिता आर्मी छोड़ने के बाद यूनिसेफ में अकाउंटेंट की नौकरी करने लगे थे। अक्षय ने पिता के नाम पर ही अपने प्रोडक्शन हाउस का नाम ‘हरि ओम एंटरटेनमेंट’ रखा।
जब अक्षय सातवीं क्लास में थे तो उनके नंबर अच्छे नहीं आए। पिता गुस्सा हुए और पूछा कि आगे क्या करना है। अक्षय डर गए और लिखकर बताया कि वे हीरो बनना चाहते हैं। जिस पर पिता ने कहा था कि पढ़ाई जरूरी है, हिंदी-इंग्लिश आनी चाहिए।
स्कूल के दिनों में बस में सफर करते हुए संजय दत्त के पोस्टर देखकर कहते थे कि एक दिन मैं भी ऐसा हीरो बनूंगा।
अक्षय ने स्कूल की पढ़ाई माटुंगा के डॉन बॉस्को हाई स्कूल से की। वहीं, उन्होंने कराटे सीखना भी शुरू किया। उनका पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं लगता था और वे मार्शल आर्ट्स सीखना चाहते थे। पिता ने पैसे इकट्ठे कर उन्हें थाईलैंड (बैंकॉक) भेजा, जहां उन्होंने थाई बॉक्सिंग सीखी। अक्षय कुमार ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हैं। करियर की शुरुआत में उन्होंने शेफ और वेटर का काम भी किया।

अक्षय कुमार ने ट्रैवल एजेंसी में नौकरी और कुंदन की ज्वेलरी बेचने का भी काम किया है।
ऐसे अक्षय कुमार मॉडलिंग में आए थे
भारत लौटने के बाद वे मार्शल आर्ट्स सिखाने लगे। एक दिन एक स्टूडेंट के पिता, जो मॉडल कोऑर्डिनेटर थे, ने उन्हें कहा, लंबे-चौड़े और अच्छे-खासे दिखते हो, मॉडलिंग क्यों नहीं करते?
जिसके बाद अक्षय ने फर्नीचर का ऐड किया और इसके लिए उन्हें सिर्फ 2 घंटे के काम में 21 हजार रुपए मिल गए। जिस पर अक्षय ने सोचा कि मैं तो महीने भर में 5 हजार रुपए कमाता हूं। यहां इतने कम समय में इतने सारे पैसे मिल गए। जिसके बाद उन्होंने यहीं से मॉडलिंग करने का फैसला किया।
इसके बाद उन्होंने फोटोग्राफर जयेश शेठ के यहां उनके असिस्टेंट और लाइटमैन के तौर पर काम किया। फिल्मों में वे बैकग्राउंड डांसर भी बने।
जब अक्षय फोटोग्राफर जयेश शेठ के साथ लाइटमैन के तौर पर काम करते थे, तब एक बार फोटोशूट के दौरान गोविंदा ने उन्हें देखकर मजाकिया अंदाज में कहा था- “ओए, हीरो क्यों नहीं बनता तू?”
इस पर अक्षय ने कहा, “सर, आप क्या मजाक कर रहे हैं?” , लेकिन गोविंदा ने दोबारा कहा -“हीरो बन, हीरो।”



राजीव भाटिया से बने अक्षय कुमार और मिल गई फिल्म
पहली बार अक्षय ने फिल्म ‘आज’ (1987) में एक कराटे इंस्ट्रक्टर का छोटा सा रोल प्ले किया था। यह रोल केवल 7-8 सेकेंड का था। इस फिल्म के बाद उन्होंने अपना नाम बदलने का फैसला किया।
उन्होंने अपना नाम बदलकर अक्षय कुमार रख लिया। दरअसल, फिल्म ‘आज’ में लीड एक्टर कुमार गौरव के किरदार का नाम अक्षय था और उन्होंने वही नाम अपना लिया।
नाम बदलने के बाद अक्षय ने सबसे पहले एक विजिटिंग कार्ड छपवाया। जिसमें उनका नया नाम और घर का पता लिखा था।
उन्होंने बताया था- “उस दिन सुबह मुझे कार्ड मिला और शाम को मुझे पहली फिल्म ‘दीदार’ मिल गई थी।”
पहली लीड रोल फिल्म से जुड़ा एक और किस्सा है। दरअसल, अक्षय बेंगलुरु में ऐड शूट के लिए जाने वाले थे, लेकिन उनकी फ्लाइट छूट गई। निराश होने के बजाय अक्षय ने खाली समय में एक फिल्म प्रोड्यूसर से मिलने का फैसला किया। उसी मुलाकात की वजह से उन्हें फिल्म ‘दीदार’ में काम करने का मौका मिला।
बाद में उन्हें और भी मूवी मिली, जिसमें ‘सौगंध’ भी शामिल थी, जो 1991 में ‘दीदार’ से पहले रिलीज हुई और इस तरह यह उनकी पहली फिल्म बनी।

अक्षय ने ‘खिलाड़ी’ टाइटल वाली सात फिल्मों में काम किया, जिनमें ‘खिलाड़ी’, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ और ‘खिलाड़ी 420’ जैसी फिल्में शामिल हैं।
शुरुआती दौर में उनकी फिल्में खास प्रदर्शन नहीं कर पाईं, लेकिन 1992 में आई फिल्म ‘खिलाड़ी’ ने उन्हें खास पहचान दिलाई। इसके बाद ‘मोहरा’, ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ और ‘ये दिल्लगी’ जैसी हिट फिल्मों ने उन्हें स्टार बना दिया। 90 के दशक में ‘खिलाड़ी’ सीरीज से वे एक्शन हीरो के रूप में लोगों के बीच पॉपुलर हो गए।
वहीं, ‘अफलातून’ जैसी फिल्मों में उनका अलग अंदाज दिखा। अपने करियर के दौरान अक्षय ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। हालांकि वो इंडस्ट्री से गायब नहीं हुए।
अक्षय कुमार ने बताया था कि लगातार 16 फ्लॉप फिल्मों के बावजूद उन्हें काम मिला क्योंकि वे हमेशा प्रोफेशनल और समय के पाबंद रहे। उन्होंने प्रोड्यूसर्स की बात मानी, सेट पर अनुशासन रखा और कभी मनमानी नहीं की।
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