किसी भी गांव की पहचान उसकी गलियों, उसके परिवेश और वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य से होती है। स्वच्छता केवल सफाई तक सीमित विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, सामूहिक जिम्मेदारी और सतत विकास का मजबूत आधार है। जब कोई ग्राम पंचायत इस सोच के साथ आगे बढ़ती है कि स्वच्छता को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जन‑आंदोलन बनाया जाए, तब उसके परिणाम दूरगामी और सकारात्मक होते हैं। ग्राम पंचायत मरहा आज इसी दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है और “स्वच्छ मरहा – स्वस्थ मरहा – सुंदर मरहा” का संकल्प धीरे‑धीरे जमीन पर साकार होता दिखाई दे रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है। घरों से निकलने वाला कचरा प्रायः गलियों, खाली प्लॉटों, नालियों या सड़क किनारे फेंक दिया जाता है, जिससे गंदगी फैलती है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के उद्देश्य से ग्राम पंचायत मरहा ने डोर‑टू‑डोर कचरा संग्रहण की ठोस व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया। इसके तहत विशेष रूप से तैयार ई‑कचरा वाहन (स्वच्छता रथ) अब पूरी तरह तैयार है, जो गांव के प्रत्येक टोले, गली और घर तक पहुंचकर गीले व सूखे कचरे का अलग‑अलग संग्रह करेगा। यह ई‑कचरा वाहन केवल एक साधन नहीं, बल्कि स्वच्छता के प्रति बदलती सोच का प्रतीक है। इसके माध्यम से गांव में पहली बार कचरे के पृथक्करण (Segregation) की व्यवस्था को व्यवस्थित रूप से लागू किया जा रहा है। गीले कचरे को जैविक अपशिष्ट और सूखे कचरे को पुनर्चक्रण योग्य सामग्री के रूप में अलग किया जाएगा। इससे न केवल गांव की सफाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि भविष्य में कम्पोस्ट खाद निर्माण और प्लास्टिक प्रबंधन जैसी योजनाओं का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत मरहा में शुरू की गई यह पहल जनपद बस्ती में लागू किए गए एक व्यापक पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। जनपद के मुख्य विकास अधिकारी श्री सार्थक अग्रवाल जी की पहल पर बस्ती की 150 ग्राम पंचायतों में डोर टू डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन को एक व्यवस्थित, टिकाऊ और व्यवहारिक स्वरूप देना है। इसी पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत ग्राम पंचायत मरहा को भी शामिल किया गया, जहां ई‑कचरा वाहन के माध्यम से गीले और सूखे कचरे के पृथक्करण व नियमित संग्रहण की व्यवस्था को धरातल पर उतारा जा रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी श्री सार्थक अग्रवाल जी की यह पहल विशेष रूप से सराहनीय है, क्योंकि उन्होंने स्वच्छता को केवल कागजी योजना तक सीमित न रखते हुए, उसे व्यावहारिक, जनसहभागिता आधारित और परिणामोन्मुख मॉडल के रूप में लागू करने का प्रयास किया है। ग्रामीण स्तर पर कचरा प्रबंधन जैसी जटिल समस्या के समाधान के लिए पायलट प्रोजेक्ट की सोच यह दर्शाती है कि जिला प्रशासन योजनाओं को प्रयोग, मूल्यांकन और विस्तार की रणनीति के साथ आगे बढ़ा रहा है।
ग्राम पंचायत मरहा का भौगोलिक क्षेत्र अपेक्षाकृत बड़ा है और आबादी भी निरंतर बढ़ रही है। इसे ध्यान में रखते हुए सफाई व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए उच्चाधिकारियों के सहयोग से एक अतिरिक्त सफाई कर्मी की तैनाती भी की गई है। इससे नालियों की सफाई, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता और कचरा संग्रहण कार्य में निरंतरता आएगी, जिससे गांव की समग्र स्वच्छता व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि किसी भी योजना की सफलता तभी संभव है, जब उसमें जनता की सक्रिय भागीदारी हो। इसी सोच के साथ ग्रामवासियों से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय पर स्वच्छता रथ को कचरा दें, खुले में कचरा फेंकने से बचें और कचरे को गीला‑सूखा अलग‑अलग रखें। यह केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण देने की सामूहिक जिम्मेदारी भी है।
स्वच्छता का सीधा संबंध जन‑स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। गंदगी के कारण फैलने वाली बीमारियां—जैसे डेंगू, मलेरिया, दस्त और त्वचा रोग—आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर समस्या बनी हुई हैं। नियमित कचरा संग्रहण और साफ‑सुथरा वातावरण इन बीमारियों की आशंका को काफी हद तक कम कर सकता है। इस दृष्टि से मरहा में शुरू की गई यह पहल केवल स्वच्छता अभियान नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संरक्षण का प्रभावी प्रयास भी है।
इस पूरी प्रक्रिया में महिलाओं और बच्चों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। घरों में कचरे का सही पृथक्करण प्रायः गृहणियों के माध्यम से ही संभव होता है, जबकि स्कूल जाने वाले बच्चे स्वच्छता के सबसे प्रभावी संदेशवाहक साबित होते हैं। ग्राम पंचायत का प्रयास है कि महिलाओं और बच्चों को जागरूक कर उन्हें इस अभियान का सक्रिय भागीदार बनाया जाए, ताकि स्वच्छता की यह आदत पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़े।
भविष्य की योजनाओं की बात करें तो ग्राम पंचायत मरहा का दृष्टिकोण केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में गीले कचरे से कम्पोस्ट खाद निर्माण, प्लास्टिक के उपयोग को न्यूनतम करने और गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाने जैसी योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही स्वच्छता की निगरानी के लिए स्थानीय स्तर पर समिति गठित करने की संभावना है, ताकि व्यवस्था की नियमित समीक्षा हो सके और कमियों को समय रहते दूर किया जा सके।
फिलहाल यह प्रयास, प्रयोग और पहल अपने शुरुआती चरण में है, लेकिन जिस स्पष्ट दृष्टिकोण, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और ग्राम पंचायत व जनता की सहभागिता के साथ इसे लागू किया जा रहा है, उससे यह निश्चित रूप से भविष्य में दूरगामी प्रभाव डालता हुआ दिखाई पड़ेगा। जनपद बस्ती की 150 ग्राम पंचायतों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया यह प्रयास आने वाले समय में चरणबद्ध ढंग से समस्त ग्राम पंचायतों में विस्तारित होकर लागू होगा। इससे ‘स्वच्छ बस्ती – सुंदर बस्ती’ की अवधारणा को साकार करने में ठोस आधार मिलेगा और जनपद को एक नई पहचान मिलेगी।
अंततः स्वच्छता कोई एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। जब हर नागरिक यह समझ ले कि साफ गांव उसकी अपनी जिम्मेदारी है, तब किसी भी अभियान को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। “आपका सहयोग – हमारी ताकत” के मूल मंत्र के साथ ग्राम पंचायत मरहा आज स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ भविष्य की ओर सशक्त कदम बढ़ा रही है।
✍️ अखिल कुमार यादव










