नई दिल्ली, 13 सितम्बर।
देशभर की अदालतों में आज राष्ट्रीय लोक अदालत 2025 का आयोजन किया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर लाखों लोगों को अपने पुराने और बकाया ट्रैफ़िक चालान निपटाने का मौका मिल रहा है। बड़ी संख्या में वाहन मालिक कोर्ट का रुख कर रहे हैं, क्योंकि लोक अदालत में चालान पर छूट और समझौते का लाभ दिया जा रहा है।
लाखों चालान लंबित
ट्रैफ़िक पुलिस के आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना, जयपुर, भोपाल समेत कई बड़े शहरों में लाखों चालान पिछले कई महीनों से पेंडिंग हैं। इनमें से कई चालान अदालत में चल रहे मुकदमों का हिस्सा बन गए थे। आज की लोक अदालत में इन मामलों का निपटारा किया जा रहा है, ताकि लोगों को राहत मिले और अदालतों का बोझ भी घटे।
किन चालानों में मिलेगी राहत?
लोक अदालत में अधिकतर छोटे-छोटे ट्रैफ़िक उल्लंघनों के मामले शामिल किए गए हैं।
- बिना हेलमेट बाइक चलाना
- कार में सीट बेल्ट न लगाना
- वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) न होना
- रेड लाइट जंप करना
- नो-पार्किंग ज़ोन में गाड़ी खड़ी करना
- मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना

इन मामलों में चालान की राशि पर 30% से 70% तक की छूट मिल सकती है।
प्रक्रिया क्या है?
वाहन मालिकों को अपने चालान की कॉपी और पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस) लेकर नज़दीकी कोर्ट में पहुँचना होगा। वहाँ ट्रैफ़िक पुलिस, वकील और जज की मौजूदगी में तुरंत सुनवाई होगी और मौके पर ही मामला खत्म कर दिया जाएगा।
आम जनता की भीड़
सुबह से ही ट्रैफ़िक चालान निपटाने वालों की लंबी कतारें कोर्ट परिसरों में देखी जा रही हैं। कई लोगों का कहना है कि लंबे समय से बढ़े हुए चालान की वजह से गाड़ी ट्रांसफर या रिन्यूअल का काम रुका हुआ था। अब लोक अदालत की वजह से उन्हें राहत मिली है।
प्रशासन की तैयारी
दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस और जिला न्यायाधीशों ने इसके लिए विशेष काउंटर बनाए हैं। डिजिटल स्क्रीन पर केस नंबर बुलाए जा रहे हैं और तुरंत निपटारे के बाद रसीद दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से लाखों मामलों का समाधान सिर्फ एक दिन में हो जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर असर
यह आयोजन सिर्फ ट्रैफ़िक चालानों तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली बिल विवाद, बैंक लोन केस, परिवारिक झगड़े और छोटे-मोटे दीवानी मामलों का निपटारा भी लोक अदालत में किया जा रहा है। लेकिन सबसे अधिक भीड़ ट्रैफ़िक चालानों की है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग इसका इंतज़ार कर रहे थे।












