नई दिल्ली, 16 सितम्बर। पूरी दुनिया में आज विश्व ओज़ोन दिवस 2025 मनाया गया। हर साल 16 सितम्बर को यह दिन पर्यावरण संरक्षण और खास तौर पर ओज़ोन परत के महत्व को याद करने के लिए मनाया जाता है। इस बार की थीम रही – “From Science to Global Action” यानी विज्ञान से वैश्विक कार्रवाई तक।
ओज़ोन परत क्यों है महत्वपूर्ण?
ओज़ोन परत को धरती की सुरक्षा ढाल कहा जाता है। यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को रोकती है। अगर यह परत कमजोर पड़ जाए तो त्वचा कैंसर, आँखों की बीमारियाँ, फसल उत्पादन में गिरावट और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएँ तेज़ी से बढ़ सकती हैं। वैज्ञानिक दशकों से चेतावनी देते रहे हैं कि औद्योगिक रसायनों और गैसों के कारण ओज़ोन परत को नुकसान हुआ है।
इतिहास और पहल
1985 में पहली बार वैज्ञानिकों ने ओज़ोन परत में छेद का पता लगाया। इसके बाद पूरी दुनिया में चिंता बढ़ी और 1987 में Montreal Protocol पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का मकसद था ओज़ोन-नाशक रसायनों जैसे CFCs, HCFCs और हैलॉन्स का इस्तेमाल बंद करना।
संयुक्त राष्ट्र ने 1994 में 16 सितम्बर को International Day for the Preservation of the Ozone Layer घोषित किया। तब से हर साल यह दिन जागरूकता और संकल्प का प्रतीक बना हुआ है।
2025 की थीम का संदेश
इस वर्ष की थीम “From Science to Global Action” यह बताती है कि कैसे वैज्ञानिक अनुसंधानों ने खतरे की पहचान की और फिर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के ज़रिए वास्तविक कदम उठाए गए। विज्ञान ने चेतावनी दी, सरकारों ने समझौते किए और अब ज़िम्मेदारी है कि नागरिक और समाज भी अपनी भूमिका निभाएँ।
दुनिया में हो रही प्रगति
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, Montreal Protocol के चलते ओज़ोन परत में सुधार दिखाई दे रहा है। यदि मौजूदा प्रयास जारी रहे, तो वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2050 तक यह परत पूरी तरह स्वस्थ हो सकती है।
कई देशों ने अपने यहाँ Ozone Depleting Substances (ODS) का उपयोग पूरी तरह खत्म कर दिया है। नई तकनीकें और पर्यावरण अनुकूल उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं।
भारत में आयोजन और जागरूकता
भारत सरकार ने भी इस अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से स्कूली और कॉलेज छात्रों के लिए प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। ‘ओज़ोन सेल’ द्वारा जन-जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें पोस्टर, निबंध, वेबिनार और सेमिनार शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत ने भी Montreal Protocol और Kigali Amendment के तहत ओज़ोन संरक्षण में अहम कदम उठाए हैं। एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर उद्योग में धीरे-धीरे ODS का इस्तेमाल खत्म किया जा रहा है।
नागरिकों के लिए अपील
विशेषज्ञों और अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि वे ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल न करें जिनमें हानिकारक गैसों का प्रयोग होता है। इसके अलावा ऊर्जा की बचत करने वाले उपकरण, सौर ऊर्जा और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाना जरूरी है।
लोगों को बताया गया कि अगर हर नागरिक छोटे-छोटे कदम उठाए तो बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि ओज़ोन परत की रक्षा करना जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई से भी जुड़ा है। क्योंकि कई ऐसी गैसें हैं जो ओज़ोन को नुकसान पहुँचाती हैं और साथ ही ग्लोबल वार्मिंग को भी बढ़ाती हैं।
उनका मानना है कि अगर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग जारी रहा और नागरिक भी जागरूक बने तो आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा।
भविष्य की राह
विश्व ओज़ोन दिवस हमें यह याद दिलाता है कि किसी भी वैश्विक समस्या से निपटने के लिए सहयोग और प्रतिबद्धता जरूरी है। विज्ञान चेतावनी देता है, सरकारें नीतियाँ बनाती हैं और समाज उन पर अमल करता है।
आज की स्थिति यह दिखाती है कि जब पूरी दुनिया एकजुट होकर काम करती है तो असंभव लगने वाले लक्ष्य भी पूरे किए जा सकते हैं।













