घर-घर अस्पताल, मानक और पंजीकरण का अभाव… क्या है यह स्वास्थ्य महाजोखिम?

बस्ती। चिकित्सा क्षेत्र में मानकों और पंजीकरण की घोर अनदेखी हो रही है। लोगों ने अपने घरों में ही अस्पताल खोल लिए हैं, जहां इलाज एक धंधे के रूप में चलाया जा रहा है। न तो डॉक्टरों के पास मान्य डिग्री है, न ही अस्पतालों के पास पंजीकरण। मरीजों की जान खतरे में डालकर उन्हें इलाज के नाम पर लूटा जा रहा है।

किराए पर आ रहे डॉक्टर, ग्रीन पर्दे की आड़ में हो रही सर्जरी

ऐसे अस्पतालों में किराए के डॉक्टर बुलाए जाते हैं, जो ग्रीन पर्दे की आड़ में कमरों में सर्जरी कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से जारी नोटिस का भी कोई असर नहीं हो रहा है। ये अस्पताल धड़ल्ले से बिना पंजीकरण और मानकों के संचालित हो रहे हैं।

जांच में मिले जुगाड़ वाले अस्पताल

पिछले महीने सीएमओ डॉ. आरएस दुबे के निरीक्षण में 50 से अधिक अस्पतालों का जायजा लिया गया, जिनमें से करीब 30 अस्पताल बिना पंजीकरण के पाए गए। इन अस्पतालों में अयोग्य लोग मरीजों का इलाज कर रहे थे। प्रशासन ने अभी तक केवल नोटिस जारी किए हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

बिना डॉक्टर के हो रहा अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे

जैसे-जैसे इन छद्दम अस्पतालों का कारोबार बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे जांच की व्यवस्था भी बिना योग्य डॉक्टरों के हो रही है। जनवरी में तत्कालीन एसडीएम ने जिला महिला चिकित्सालय के सामने सात अल्ट्रासाउंड सेंटरों को सील कर दिया था, लेकिन कुछ समय बाद वे फिर से चालू हो गए। जुलाई माह में भी सीएमओ ने तीन निजी नर्सिंग होम्स में बिना डॉक्टर के अल्ट्रासाउंड मशीन संचालित होते पाए।

पंजीकरण में डिग्री बीएमएस की, कर रहे सर्जरी

जिले के कई निजी अस्पतालों में बीएमएस डिग्री धारक डॉक्टर सर्जरी कर रहे हैं। गर्भवती महिलाओं, पथरी, हड्डी, हाइड्रोसील जैसी बीमारियों की सर्जरी बिना विशेषज्ञ सर्जनों के की जा रही है। यह सब जानते हुए भी प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करने से बच रहा है।

स्थायी तौर पर नहीं है बेहोशी के डॉक्टर

अधिकांश निजी अस्पतालों में बेहोशी के डॉक्टर स्थायी रूप से नहीं हैं। यह सुविधा केवल अस्थायी तौर पर दी जाती है, जबकि सर्जरी के लिए बेहोशी के डॉक्टर का होना अनिवार्य है।

ऐसे हो रहा चिकित्सकों का इंतजाम

निजी अस्पतालों में सर्जरी और बेहोशी के डॉक्टरों को प्रति केस के आधार पर बुलाया जाता है। इनमें सरकारी चिकित्सक भी शामिल होते हैं, जो अपने अस्पताल की ड्यूटी के बाद निजी अस्पतालों में शाम को काम करते हैं। जानकारों के मुताबिक, प्रति केस बेहोशी के डॉक्टर को ढाई से तीन हजार रुपये और सर्जन को 10 से 15 हजार रुपये दिए जाते हैं।

सीएमओ का बयान

डॉ. आरएस दुबे, सीएमओ ने कहा कि निजी अस्पतालों, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की लगातार जांच कराई जा रही है। जहां डॉक्टर और पंजीकरण नहीं मिल रहा है, वहां नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है। इसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

Bindesh Yadav
Bindesh Yadavhttps://newsxpresslive.com
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