नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को Cockroach Janta Party (CJP) द्वारा आयोजित प्रदर्शन ने सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। शुरुआत में इंटरनेट पर व्यंग्य और मीम संस्कृति से जुड़े इस समूह का आंदोलन अब शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं और युवाओं के मुद्दों को लेकर एक बड़े विरोध प्रदर्शन के रूप में सामने आया है।
प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने NEET परीक्षा में कथित धांधली, पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने National Testing Agency (NTA) को लेकर भी नाराजगी जाहिर की और कई जगह “NTA बंद करो” के नारे सुनाई दिए। छात्रों का कहना था कि लगातार सामने आ रहे विवादों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस आंदोलन की खास बात यह रही कि इसमें केवल युवा ही नहीं बल्कि बुजुर्ग भी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान एक बुजुर्ग व्यक्ति केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वाली तख्ती लेकर छात्रों के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। यह दृश्य सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना रहा।
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारेबाजी हुई और कई प्रदर्शनकारियों ने उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। कुछ स्थानों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ भी नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त जवाबदेही तय नहीं की जा रही है।
जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ के बीच मीडिया को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली। कई प्रदर्शनकारियों ने “गोडी मीडिया हाय-हाय” और “गोडी मीडिया गो बैक” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों का कहना था कि छात्रों के मुद्दों को मुख्यधारा की मीडिया में पर्याप्त महत्व नहीं दिया जाता।
प्रदर्शन शुरू होने से पहले दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई थी। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बैरिकेडिंग और ट्रैफिक प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए थे। बाद में CJP की ओर से दावा किया गया कि संगठन को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मिल गई थी और यह कार्यक्रम प्रशासन की जानकारी में आयोजित किया गया।
इस बीच एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें दावा किया गया कि दिल्ली पुलिस का एक जवान प्रदर्शन स्थल से CJP की प्रचार सामग्री अपने साथ ले गया। वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि सामग्री को किस कारण से हटाया गया या अपने साथ ले जाया गया।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और संगठन के अन्य प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका आंदोलन युवाओं की आवाज को सामने लाने का प्रयास है। संगठन का दावा है कि यह सिर्फ एक इंटरनेट मीम या व्यंग्य अभियान नहीं रहा, बल्कि अब शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जनसमर्थन जुटाने वाला आंदोलन बन चुका है।
फिलहाल जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आंदोलन केवल एक प्रतीकात्मक विरोध तक सीमित रहता है या फिर व्यापक छात्र आंदोलन का रूप लेता है।









