उमरिया नवरात्रि पर्व भारतीय संस्कृति का प्रतीक है, जहाँ आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हिंदू मुस्लिम एकता मंच के तत्वावधान में नवरात्रि की नवमी दिनांक 1 अक्टूबर 2025 को रमपुरी तिराहा, जिला उमरिया में भव्य गरबा महोत्सव 2025 का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को जीवंत किया, बल्कि समाज में भाईचारा और एकता का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ
गरबा महोत्सव का शुभारंभ मातारानी के नारों से किया गया। इसके बाद रंग–बिरंगे परिधानों में सजे–धजे प्रतिभागियों ने पारंपरिक डांडिया और गरबा नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम स्थल पर सैकड़ों की संख्या में दर्शकों की भीड़ उमड़ी, जिन्होंने उत्साहपूर्वक कलाकारों का हौसला बढ़ाया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ
कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों और बच्चों ने भी आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं की टोली ने पारंपरिक नवरात्रि गीतों पर समूह नृत्य कर समा बाँध दिया। वहीं बच्चों द्वारा प्रस्तुत भक्ति गीतों और नृत्यों ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।

पुरस्कार वितरण
गरबा महोत्सव में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पुरस्कार वितरण भी किया गया। विजेताओं को स्मृति चिन्ह और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इससे न केवल प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ा बल्कि भविष्य में सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी के लिए भी प्रेरणा मिली।
मंच के संस्थापक मो. असलम शेर ने अपने उद्बोधन में कहा कि नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। इस पर्व का सबसे बड़ा संदेश है एकता और प्रेम। हिंदू मुस्लिम एकता मंच का उद्देश्य है कि समाज में सभी धर्म, जाति और वर्ग के लोग मिलकर एक-दूसरे की खुशियों में शामिल हों और भाईचारे की मिसाल पेश करें। इस गरबा महोत्सव ने यही दिखाया कि हम सब मिलकर उत्सव मना सकते हैं और समाज को एकता का संदेश दे सकते हैं।
कार्यक्रम के संयोजक राजेंद्र कोल ने कहा गरबा महोत्सव न केवल धार्मिक आयोजन है बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत उदाहरण है। इस आयोजन से युवाओं को अपनी परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। हमें गर्व है कि उमरिया जैसे छोटे जिले से भी हम समाज में सौहार्द और संस्कृति को जीवित रखने का कार्य कर रहे हैं।

सामाजिक संदेश
इस आयोजन ने स्पष्ट रूप से यह संदेश दिया कि त्योहार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह समाज को जोड़ने और सकारात्मक ऊर्जा फैलाने का माध्यम भी हैं। गरबा महोत्सव में जिस तरह सभी धर्म और वर्ग के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, उसने भाईचारे और सौहार्द्र की मिसाल कायम की।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में शामिल दर्शकों ने इसे बेहद सराहा और आयोजकों की सराहना की। कई लोगों ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन से समाज में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है। बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति और परंपरा से जोड़ने का यह एक सराहनीय प्रयास है।












