बस्ती जिले में अवैध हुक्का बार संचालन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोप है कि होटल, कैफे और रेस्टोरेंट की आड़ में कई स्थानों पर हुक्का बार संचालित किए जा रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में युवा पहुंचकर हुक्के के धुएं के छल्ले उड़ाते नजर आते हैं।
सूत्रों के मुताबिक जिले के कुछ थानों और चौकियों के कथित वसूलीबाजों की मिलीभगत और संरक्षण से यह कारोबार फल-फूल रहा है। चर्चा यह भी है कि जहां से कथित रूप से “लिफाफा” नहीं पहुंचता, वहां कार्रवाई कर वाहवाही लूटी जाती है, जबकि जहां से नियमित रूप से पैसा पहुंचने की बात कही जाती है, वहां कार्रवाई से पहले ही हुक्का बार बंद हो जाते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मुखबिरी कौन कर रहा है? संरक्षण और मिलीभगत के आरोपों की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हो रही? चौकियों और थानों के आसपास लंबे समय से संचालित बताए जा रहे हुक्का बार आखिर किसके संरक्षण में चल रहे हैं?
पचपेड़िया रोड, स्टेशन रोड, पटेल चौक, पॉलिटेक्निक चौराहा, कोतवाली क्षेत्र और गांधीनगर इलाके में कई स्थानों पर हुक्का बार संचालन की चर्चाएं जोरों पर हैं। बताया जाता है कि संचालक सांकेतिक नामों और विभिन्न फ्लेवर के माध्यम से ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं।
बर्थडे पार्टी हो या दोस्तों की महफिल, हुक्के के धुएं के बिना पार्टी अधूरी मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार विभिन्न फ्लेवर 200 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक की कीमत पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे युवाओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है।
आरोप है कि प्रतिबंध और नियम-कायदों को धुएं में उड़ाकर यह कारोबार खुलेआम संचालित किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभागों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
लोगों का कहना है कि एक-दो स्थानों पर कार्रवाई कर अपनी पीठ थपथपाने वाले जिम्मेदार अधिकारियों को जिले के अन्य अवैध हुक्का बारों के खिलाफ भी व्यापक अभियान चलाना चाहिए, ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोका जा सके।
अब देखने वाली बात यह होगी कि संरक्षण, मिलीभगत और अवैध संचालन के आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं, तथा जिम्मेदार विभाग जिलेभर में संचालित बताए जा रहे अवैध हुक्का बारों के खिलाफ कब बड़ा अभियान चलाते हैं।










