अयोध्या जिले की रौनाही पुलिस एक बार फिर चर्चा में है। गंभीर मामलों में रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी के आरोप झेल रही पुलिस ने इस बार एक ऐसा मुकदमा दर्ज कर दिया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला 25 वर्ष पहले मृत हो चुके व्यक्ति के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज किए जाने का है।
जानकारी के अनुसार थाना रौनाही क्षेत्र के ग्राम पंचायत पिरखौली निवासी दलित धमसादीन की तहरीर पर पुलिस ने भुईंधर तिवारी सहित आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। हैरानी की बात यह है कि भुईंधर तिवारी का करीब 25 वर्ष पूर्व निधन हो चुका है। मृत व्यक्ति के नाम मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आते ही क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बन गया।
मृतक भुईंधर तिवारी के पौत्र उमाशंकर तिवारी ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत बीकापुर विधायक डॉ. अमित सिंह चौहान से की। शिकायत सुनकर विधायक भी हैरान रह गए। इसके बाद उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर को फोन कर पूरे मामले से अवगत कराया और मुकदमा दर्ज कराने वालों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग की।
बताया जा रहा है कि पिरखौली गांव में धमसादीन और उमाशंकर तिवारी के बीच नाली निकालने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। आरोप है कि 5 जून की सुबह विवाद के दौरान एक पक्ष ने उमाशंकर तिवारी के घर पर हमला कर दिया, जिसके बाद मारपीट की घटना हुई। इसी मामले में धमसादीन की तहरीर पर पुलिस ने उमाशंकर तिवारी और उनके परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
विवाद का दूसरा पहलू यह है कि एफआईआर में मृतक भुईंधर तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। इतना ही नहीं, एफआईआर में उनके पिता का नाम भी गलत दर्ज किया गया है। परिजनों का कहना है कि भुईंधर तिवारी के पिता का नाम रामदुलारे था, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में उनके पुत्र शेखरचंद्र तिवारी को ही उनका पिता दर्शा दिया गया है।
उधर, दूसरा पक्ष होने के बावजूद उमाशंकर तिवारी अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने के चक्कर काट रहा है। इससे पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
मामले पर थाना प्रभारी रौनाही लालचंद सरोज का कहना है कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच के दौरान यदि कोई नाम गलत पाया जाता है तो उसे मुकदमे से हटा दिया जाएगा।
अब सवाल यह है कि आखिर बिना प्राथमिक सत्यापन के 25 वर्ष पहले मृत व्यक्ति के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा कैसे दर्ज हो गया? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर जांच प्रक्रिया में कोई बड़ी चूक? फिलहाल पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।









