नई दिल्ली। विशेष रिपोर्ट।
राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस बार मुद्दा सिर्फ खरीद प्रक्रिया या मूल्य का नहीं, बल्कि “सोर्स कोड” जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू को लेकर है। यह तथ्य सामने आ रहा है कि भारत सरकार को राफेल विमान का सोर्स कोड कभी नहीं सौंपा गया – यानी भारत इन विमानों को अपनी शर्तों पर न तो अपग्रेड कर सकता है और न ही ज़रूरत पड़ने पर स्वतंत्र रूप से रिपेयर।
इस मुद्दे पर चौंकाने वाला आरोप यह है कि न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बल्कि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, सांसद राहुल गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसे सभी प्रमुख नेता इस संवेदनशील पहलू पर चुप रहे। उन्होंने जनता को यह नहीं बताया कि भारत को तकनीकी रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं बनाया गया, बल्कि फ्रांस पर पूरी तरह निर्भर बना दिया गया है।
क्या है सोर्स कोड का महत्व?
सोर्स कोड किसी भी हाई-टेक रक्षा प्रणाली का मूल प्रोग्रामिंग कोड होता है, जिसके माध्यम से उसे अपग्रेड, मॉडिफाई या रिपेयर किया जा सकता है। अगर वह कोड देश के पास नहीं है, तो वह हर तकनीकी सहायता के लिए मूल निर्माता देश पर निर्भर रहेगा। यही स्थिति अब भारत की है — राफेल के हर अपडेट या मरम्मत के लिए फ्रांसीसी इंजीनियरों और कंपनियों की आवश्यकता है।
युद्ध के दौरान संकट की आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध के समय फ्रांस भारत को तकनीकी सहायता देने से इनकार कर दे या अत्यधिक मूल्य वसूले, तो भारत की सुरक्षा व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। साथ ही, अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को खुलेआम हथियार बेचने की नीतियों ने भारत की सामरिक चिंता और भी बढ़ा दी है।
सिर्फ नेता नहीं, चर्चित चेहरे भी चुप
इस ‘तथ्य-छुपाने’ की आलोचना अब उन गैर-राजनीतिक, प्रभावशाली हस्तियों की ओर भी बढ़ रही है जिन्होंने इस विषय पर कभी सवाल नहीं उठाया।
योगगुरु रामदेव, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर, वक्ता प्रशांत त्रिपाठी (आचार्य प्रशांत), पत्रकार रविश कुमार, अर्नब गोस्वामी, और राठी जैसे नामचीन लोग भी इस मुद्दे पर मौन साधे रहे।
कई विश्लेषकों का कहना है कि यदि जनता को यह जानकारी पहले दी जाती, तो सरकार से पारदर्शिता और सामरिक आत्मनिर्भरता की मांग अधिक प्रभावी रूप से उठाई जा सकती थी।

यह मामला न सिर्फ एक रक्षा सौदे का तकनीकी पहलू है, बल्कि भारत की सैन्य संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है। अब समय है कि सरकार और प्रभावशाली लोग इन तथ्यों को सार्वजनिक करें और नागरिकों को पूरी सच्चाई से अवगत कराएं।











