इस शहर का मौसम है सबसे अलग, गर्मी में आग तो सर्दी में बर्फ जैसा हाल

गयाजी: गया इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। बिहार के कई जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, लेकिन गया की स्थिति सबसे अलग और ज्यादा चिंताजनक मानी जा रही है।

यहां की गर्मी सिर्फ मौसम नहीं, बल्कि भौगोलिक संरचना और मानवीय गतिविधियों का परिणाम भी मानी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गया अब धीरे-धीरे ‘हीट ट्रैप’ यानी गर्मी को रोककर रखने वाले क्षेत्र में बदलता जा रहा है।

अप्रैल से ही यहां गर्म हवाओं का असर शुरू हो गया था। मई में स्थिति और गंभीर हो गई। पिछले कुछ दिनों में तापमान लगातार 40 डिग्री के आसपास या उससे ऊपर दर्ज किया गया। 18 मई 2026 को यहां अधिकतम तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने लोगों की परेशानी बढ़ा दी।

गया कॉलेज के भूगोल विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर रामकृष्ण प्रसाद यादव के अनुसार, गया की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वृताकार भौगोलिक संरचना है। शहर चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है। ऊपर से देखने पर भले ही पहाड़ियां अलग-अलग दिखती हों, लेकिन भूगर्भीय रूप से वे एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरह की संरचना गर्म हवा को बाहर निकलने नहीं देती। नतीजतन शहर का मध्य भाग ज्यादा गर्म हो जाता है। यही वजह है कि गया में गर्मी अधिक तीखी महसूस होती है।

फल्गु नदी भी गया की गर्मी का बड़ा कारण मानी जा रही है। नदी में पानी की जगह अधिकतर हिस्सों में बालू दिखाई देती है। वैज्ञानिक दृष्टि से बालू तेजी से गर्मी को अवशोषित करती है और फिर उसे वातावरण में छोड़ती है। इस प्रक्रिया का सीधा असर आसपास के तापमान पर पड़ता है। यही कारण है कि दोपहर के समय गया में गर्म हवाएं ज्यादा तेज महसूस होती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदी में जल प्रवाह बेहतर हो, तो तापमान में कुछ राहत मिल सकती है। प्रोफेसर यादव बताते हैं कि कभी गया की पहाड़ियों पर घने पेड़ हुआ करते थे, लेकिन समय के साथ बड़े पैमाने पर जंगल खत्म कर दिए गए।

पेड़ों की कमी ने इलाके के प्राकृतिक तापमान संतुलन को प्रभावित किया। पहाड़ों पर हरियाली कम होने से चट्टानें सीधे सूरज की गर्मी सोखती हैं।

दिनभर गर्म रहने वाली ये चट्टानें रात में भी गर्मी छोड़ती रहती हैं। इसी वजह से गया में रात के समय भी गर्मी से राहत कम मिलती है।विशेषज्ञों के अनुसार, गया की पहाड़ियां अत्यंत प्राचीन ‘रूपांतरित शैलों’ से बनी हैं।

इनकी उम्र करीब साढ़े तीन अरब वर्ष बताई जाती है। यह दुनिया की सबसे पुरानी चट्टानों में गिनी जाती हैं। इन चट्टानों की खासियत यह है कि ये गर्मी को लंबे समय तक अपने अंदर बनाए रखती हैं।

ठंड के मौसम में यही चट्टानें तेजी से ठंडी होकर सर्दी बढ़ा देती हैं। इसलिए गया में मौसम का असर बाकी जिलों की तुलना में ज्यादा तीखा महसूस होता है।

Bindesh Yadav
Bindesh Yadavhttps://newsxpresslive.com
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