
भारत के कई राज्यों में महिलाएं सावन और भाद्रपद महीने में आने वाले तीज के त्योहारों का बड़ी श्रद्धा से इंतजार करती हैं। इनमें से एक प्रमुख पर्व है हरतालिका तीज, जो इस साल मंगलवार, 26 अगस्त 2025 को मनाई जाएगी। उत्तर भारत में खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड की महिलाएं इस पर्व को बड़ी आस्था से मनाती हैं। वहीं दक्षिण भारत में इसे गौरी हब्बा कहा जाता है और यहां कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में इसका विशेष महत्व है।शुभ मुहूर्त
पूजा का समय: सुबह 05:56 से 08:31 तक (कुल अवधि 2 घंटे 35 मिनट)
तृतीया तिथि प्रारंभ: 25 अगस्त, दोपहर 12:34 बजे
तृतीया तिथि समाप्त: 26 अगस्त, दोपहर 01:54 बजे

हरतालिका तीज का महत्व
यह पर्व पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख के लिए रखा जाता है। विवाहित महिलाएं निर्जला व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी यह व्रत करती हैं ताकि उन्हें योग्य जीवनसाथी मिले। हरतालिका तीज के साथ-साथ हरियाली तीज और कजरी तीज को भी खास महत्व प्राप्त है।
व्रत की कथा
कहा जाता है कि हिमालय की पुत्री पार्वती का विवाह उनके पिता ने भगवान विष्णु से तय कर दिया था। लेकिन पार्वती जी केवल भगवान शिव को ही पति रूप में पाना चाहती थीं। अपनी सखियों की मदद से वे वन में चली गईं और कठोर तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। यही कारण है कि इस दिन का नाम पड़ा हरतालिका — हर (हरण) और आलिका (सखी)।
पूजा विधि
महिलाएं अंत में बड़ों का आशीर्वाद लेती हैं।
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
घर और पूजा स्थल को साफ कर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
घी का दीपक जलाएं और माता पार्वती को श्रृंगार सामग्री, फूल और आभूषण अर्पित करें।
पूड़ी, आलू की सब्जी, हलवा और खीर जैसे भोग बनाए जाते हैं।
संध्या समय आरती और कथा का पाठ किया जाता है।

सूर्यास्त के बाद व्रत खोला जाता है और प्रसाद बांटा जाता है।हरतालिका तीज केवल उपवास और पूजा का दिन नहीं, बल्कि यह अटूट प्रेम, विश्वास और वैवाहिक सौहार्द का प्रतीक है। यही वजह है कि यह पर्व उत्तर और दक्षिण, दोनों ही भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
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