बस्ती। जनपद बस्ती में एक आत्महत्या प्रकरण और उससे जुड़े मुकदमे को लेकर नया मोड़ सामने आया है। क्षेत्र के दर्जनों ग्रामीणों ने एकजुट होकर पुलिस अधीक्षक बस्ती को हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना पत्र सौंपते हुए विश्व हिंदू महासभा के जिला अध्यक्ष अखिलेश सिंह की भूमिका की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि पप्पू सिंह एवं श्याम बहादुर सिंह को कथित रूप से गलत तरीके से मुकदमे में नामजद कराया गया है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
ग्रामीणों द्वारा पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामले में कई ऐसे पहलू हैं जिनकी अभी तक गहन जांच नहीं हुई है। उन्होंने मांग की है कि किसी स्वतंत्र जांच टीम अथवा वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में मामले की जांच कराई जाए।
ज्ञापन में शामिल ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष ढंग से कराई जाती है तो पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आ सकती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रभाव और दबाव के चलते कुछ लोगों को मुकदमे में शामिल कराया गया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति दोषी है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यदि किसी निर्दोष को गलत तरीके से फंसाया गया है तो उसे न्याय मिलना चाहिए।
प्रार्थना पत्र के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी संलग्न किए गए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों की नहीं बल्कि क्षेत्र के अनेक लोगों की सामूहिक मांग है। उनका कहना है कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि क्षेत्र में फैली शंकाओं और विवादों का अंत हो सके।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), पुलिस अधीक्षक बस्ती तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समाचार लिखे जाने तक पुलिस प्रशासन की ओर से मामले को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। हालांकि ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनके ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।










