नई दिल्ली/एजेंसी
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) आने के बाद भले ही देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने स्कूली शिक्षा में सुधार की दिशा में अहम कदम बढ़ाए हैं, लेकिन ज्यादातर राज्यों में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की अभी और भी बड़ी जरूरत है। इसका अंदाजा शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कूलों के प्रदर्शन को लेकर जारी की गई परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआइ) रिपोर्ट से लगाया जा सकता है,
जिसमें कोई भी राज्य शीर्ष चार श्रेणियों में जगह नहीं बना पाया है। यह बात अलग है कि देश में जिन राज्यों का स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन रहा है, उनमें चंडीगढ़, पंजाब, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा, केरल और ओडिशा जैसे राज्य शीर्ष पर है। वहीं मेघालय, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, असम जैसे राज्यों का प्रदर्शन सबसे निचले स्तर पर रहा है।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कूली शिक्षा के प्रदर्शन को लेकर दस श्रेणियों में कराए गए सर्वेक्षण में सभी राज्यों को लेकर स्थिति सामने आई है। बच्चों के सीखने की क्षमता (लर्निंग आउटकम), इन्फ्रास्ट्रक्चर व प्रबंधन सहित करीब 73 मानकों पर कराए गए सर्वेक्षण के आधार पर राज्यों का यह प्रदर्शन निर्धारित किया गया है। यह बात अलग है कि 2021-22 में पहली बार कराए गए पीजीआइ सर्वेक्षण के बाद राज्यों के प्रदर्शन में अब बदलाव आया है।
पहली बार किसी राज्य ने प्रचेष्ठा-1 श्रेणी में जगह बनाई है। इससे पहले किसी राज्य ने प्रचेष्ठा-3 तक ही जगह बनाई थी। इस बार चंड़ीगढ़ ने प्रचेष्ठा-1 श्रेणी में जगह बनाई है।
जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले बाकी राज्यों ने प्रचेष्ठा-3 में जगह बनाई है। गौरतलब है कि पीजीआइ के लिए जो श्रेणी बनाई गई है, उनमें पहली श्रेणी-दक्ष, दूसरी-उत्कर्ष, तीसरी-अति उत्तम, चौथी-उत्तम, पांचवीं-प्रचेष्ठा-1, छठवीं- प्रचेष्ठा-2, सातवीं- प्रचेष्ठा-3, आठवीं-आकांक्षी-1, नौवीं- आकांक्षी-2 और दसवीं श्रेणी- आकांक्षी-3 की है।
इस राज्यों का औसत रहा प्रदर्शन
पीजीआइ रिपोर्ट 2022-23 व 2023-24 के मुताबिक, जिन राज्यों में स्कूली शिक्षा का प्रदर्शन औसत रहा है। उनमें उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, बंगाल, तमिलनाडु, उत्तराखंड, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य रहे हैं। ये राज्य आंकाक्षी-1 श्रेणी में ही जगह बना पाए हैं।












