बस्ती। इंडियन योग एसोसिएशन (आईवाईए) उत्तर प्रदेश चैप्टर एवं पतंजलि योग समिति, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे “योग पार्क अभियान” के अंतर्गत उद्यान विभाग के पार्क में योग प्रोटोकॉल अभ्यास शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन आईवाईए के चेयरपर्सन पीयूषकांत मिश्रा, सचिव अमित गर्ग, पूर्वी जोन के अध्यक्ष डॉ. नवीन सिंह, सचिव आशीष टंडन एवं सह सचिव डॉ. रमेश चंद्रा के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर में योग साधकों को नियमित योगाभ्यास एवं योग प्रोटोकॉल का अभ्यास कराया गया तथा योग को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संदेश दिया गया।

योगाचार्य गरुण ध्वज पाण्डेय ने कहा कि योग के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को निरोग एवं स्वस्थ रख सकता है। योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का ही नहीं, बल्कि मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से जीवनशैली संबंधी अनेक बीमारियों से बचाव संभव है।
वरिष्ठ पत्रकार पुनीत दत्त ओझा ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी दैनिक दिनचर्या में योग को शामिल करना चाहिए। योग से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है, जिससे व्यक्ति स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन जी सकता है।
योगाचार्य गरुण ध्वज पाण्डेय एवं सौरभ तुलस्यान ने प्रतिभागियों को अनुलोम-विलोम, प्राणायाम एवं विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास कराया तथा उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नियमित प्राणायाम तनाव को कम करने, मानसिक शांति बनाए रखने एवं शरीर की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक है।

भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के जिला प्रभारी ओम प्रकाश आर्य ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को सफल बनाने के लिए कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को योग से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से 21 जून को आयोजित होने वाले सामूहिक योग कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने की अपील की।
इस अवसर पर मंजेश राजभर, डॉ. सच्चिदानंद शुक्ला, विनोद कुमार मिश्र, मनोज यादव, सौरभ सिंह, अभिनव पाण्डेय, शिवेंद्र, संतोष भारद्वाज, वरिष्ठ पत्रकार संदीप गोयल, वरिष्ठ पत्रकार पुनीत दत्त ओझा, बलराम तिवारी, बैजनाथ, राधेश्याम, अशोक यादव, सूर्य प्रताप, भूपेंद्र चौधरी, शिवकुमार चौधरी सहित अनेक योग साधक उपस्थित रहे।










