आर्य समाज नई बाजार बस्ती द्वारा संचालित स्वामी दयानन्द विद्यालय सुरतीहट्टा बस्ती में आयोजित यज्ञ विषयक गोष्ठी में विद्यालय के बच्चे शिक्षक शामिल हुए। इस अवसर पर क्रियात्मक यज्ञ कराते हुए ओम प्रकाश आर्य प्रधान आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने बताया कि यज्ञ का अर्थ होता है श्रेष्ठ व उत्तम कर्म। यज्ञ से मनुष्यों को संसार की सबसे मूल्यवान वस्तु ‘शुद्ध प्राणवायु’ की प्राप्ति होती है।

मनुष्य के जीवन में वायु, जल, अग्नि सहित अन्न, भोजन, वस्त्र, ज्ञान तथा परस्पर सहयोग की भावना का महत्व होता है। वायु इन सभी पदार्थों में सबसे अधिक मूल्यवान पदार्थ है। अग्निहोत्र देवयज्ञ दूषित प्राण वायु को गोघृत आदि यज्ञीय पदार्थों को जलाकर शुद्ध व सुगन्धित करता है। यज्ञ से शुद्ध हुआ वायु देश देशान्तर में जाता है जिससे यज्ञ करने वालों को तो लाभ होता ही है,

इसके साथ ही असंख्य प्राणियों को भी लाभ पहुंचता है। प्रधानाध्यापक आदित्यनारायण गिरि ने बताया कि यज्ञ में घृत आदि सामग्री की जो आहुतियां दी जाती हैं वह यज्ञ की अग्नि में जलकर अत्यन्त सूक्ष्म होकर हल्की हो जाती है और वायु व सूर्य की किरणों के द्वारा वायु व आकाश में सर्वत्र फैल कर जहां जहां दुर्गन्ध होती है, उसको दूर करती हैं। इससे सभी सूक्ष्म व स्थूल प्राणियों को लाभ होता है। शिक्षक अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि

यज्ञ से अनेक लाभ होते हैं। यज्ञ से रोगों को दूर करने सहित पुत्र व सन्तान की कामना आदि अनेकों कामनायें सिद्ध की जा सकती हैं। प्राचीन काल से अनेक काम्य यज्ञों का प्रचलन भी रहा है। वेद मन्त्रों में इनका विधान व प्रार्थना की गई है। विधिपूर्वक अग्निहोत्र यज्ञ करने से इनकी प्राप्ति का अनुमान किया जाता है। महाराजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ की चर्चा भी हम सुनते हैं। इसी प्रकार अश्वमेध तथा गोमेध यज्ञों सहित राजसूय यज्ञ की चचायें भी प्राचीन ऐतिहासिक ग्रन्थों में पढ़ने को मिलती है। इस अवसर पर दिनेश कुमार, अनूप कुमार त्रिपाठी, अनीशा मिश्रा, शिवांगी गुप्ता, अंशिका पाण्डेय स्वप्नल सहित विद्यालय के बच्चे सम्मिलित रहे।
गरुण ध्वज पाण्डेय
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