आर्य समाज नई बाजार बस्ती द्वारा वैदिक यज्ञ कर अमर हुतात्माओं सरदार भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को याद किया गया। इस अवसर पर ओम प्रकाश आर्य प्रधान आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने भगत सिंह के बारे में बताते हुए कहा कि भगत सिंह के दादा श्री अर्जुन सिंह जी का यज्ञोपवीत संस्कार स्वयं “महर्षि दयानंद सरस्वती जी” ने ही करवाया था।
सरदार अर्जुन सिंह जी महर्षि दयानन्द के वैदिक विचारों से बहुत प्रभावित थे। वे महर्षि दयानंद जी के आरम्भिक शिष्यों में से एक थे। सरदार अर्जुन सिंह जी ने गुरुद्वारे से आर्य समाज तक का सफर तय किया था। वे दैनिक यज्ञ व्रती थे। जब उन्होंने अपने दोनों पोतो जगत सिंह और भगत सिंह का यज्ञोपवीत करवाया था
तब उन्होंने अपने दोनों पोतो को दाएंऔर बाएं बाजू के नीचे लेकर ये प्रतिज्ञा ली थी की मै अपने दोनों पोतो को देश की बलिवेदी पर दान करता हूँ। भगत सिंह जी के पिता जी का नाम सरदार किशन सिंह था और माँ का नाम विद्यावती था । दोनों परिवार सिख थे लेकिन उनका विवाह वैदिक रीति से हुआ था अर्थात फेरे गुरुग्रन्थ साहिब के स्थान पर यज्ञ वेदी के फेरे लिए थे । भगत सिंह अपने दादा जी को जब भी पत्र लिखते थे तो ओ३म् और नमस्ते ही लिखते थे। भगत सिंह लाला लाजपत राय जी द्वारा संचालित नेशनल कोलेज के छात्र थे । और प्रसिद्ध आर्य विद्वान जयचन्द्र विद्यालंकार , उदयवीर शास्त्री तथा भाई परमानन्द जी के शिष्य थे ।
भगतसिंह का प्रसिद्ध चित्र तिरछी टोपी वाला आर्यसमाज कलकत्ता(विधान सारणी) में लिया गया था क्योंकी भगत सिंह ने लाहौर में सांडर्स को मारने के बाद वेश बदलकर वही शरण ली थी। भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान को भारत कभी भुला नहीं सकेगा। कार्यक्रम में आदित्य नारायण गिरी, अरविन्द श्रीवास्तव, दिनेश कुमार, नितीश कुमार, शिव श्याम, रजनी मिश्रा, नीलम मिश्रा, शताक्षी मिश्रा, गणेश आर्य, रिमझिम, राजेश्वरी, विश्वनाथ, स्वप्नल, शिवांगी, अनीशा मिश्रा, ज्योति सोनी, सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
गरुण ध्वज पाण्डेय













