-कुछ ग्राम पंचायतों में कागजी हाजिरी का खेल बदस्तूर जारी, आखिर कब टूटेगी बीडीओ की रहस्यमयी चुप्पी
-सेवा के अंतिम पड़ाव में पहुँचे बीडीओ हिसाब-किताब में मस्त, विभाग की भूले मर्यादा
स्थान : बस्ती, उत्तर प्रदेश
बस्ती संवाददाता : सुरा का असली असर देखना हो तो कप्तानगंज विकास खण्ड मुख्यालय आ जाइए क्योंकि यहां पर “जाम से जाम” लड़ाने का कोई निर्धारित समय नहीं है जब मन हुआ तभी जरूरतमंद शुरू हो जाते है जिसके कारण ब्लाक परिसर मयखाने में तब्दील हो गया है कहना अतिश्योक्त नही होगा।
विकास के नींव की शुरुआत करने वाला विकास खण्ड कप्तानगंज का मुख्यालय खुद के ही विकास से अछूता रह गया क्यों कि यहाँ विकास की बातें दिवास्वप्न जैसी हैं। यहाँ के जिम्मेदार तो दिन ही से जाम लगाना शुरु कर देते हैं और परिसर मयखाने में तब्दील हो जाता है ।
सेवा के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे खण्ड विकास अधिकारी ब्लाक का विकास करने के बजाय खुद के विकास व लेखा – जोखा दुरुस्त करने में लगे हैं । दूसरों के विकास का जिम्मा संभालने वाले ब्लाक के कर्मचारी, ब्लाक क्षेत्र के विकास के बजाय खुद के विकास में मशगूल हैं।.
इसी बीच क्षेत्र की कुछ ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों को लेकर कागजी हाजिरी का खेल भी थमने का नाम नहीं ले रहा है, जहां धरातल पर कार्य की स्थिति और अभिलेखों में दर्ज विवरण में स्पष्ट अंतर पाया जा रहा है, जबकि कागजों में सब कुछ दुरुस्त दिखाया जा रहा है।
वहीं बीडीओ की रहस्यमयी खामोशी भी लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाओं का विषय बना हुआ है। अब लोग पूछने लगे हैं कि आखिर इस खेल पर लगाम कब लगेगी क्योंकि यदि ब्लाक के किसी भी कर्मचारी मय बीडीओ की यदि सही तरीक से जाँच हो जाए तो लगभग बहुतों चेहरे बेनकाब हो जाना तय है ।
ब्लाक कर्मचारियों को अपनी असलियत यदि जानना है तो हिम्मत करके एक शिकायत पेटिका टंगवाकर देख लें जनता व पीड़ित उनकी कलई खोलकर रख देंगें ।अब देखना यह है कि जनपद के तेजतर्रार सीडीओ व्यवस्था व कप्तानगंज ब्लाक मुख्यालय की कार्य प्रणाली में कुछ सुधार ला पाते हैं या ऐसे ही विभाग की इज्जत नीलाम होती रहेगी या फिर योजनाओं को छकाने और जाम से जाम लड़ाने का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।













