आर्य समाज और आर्य वीर दल 21से 27 दिसम्बर तक मनाएगा *वीरोत्सव, देगा अमर हुतात्माओं को श्रद्धांजलि-ओम प्रकाश आर्य

आर्य समाज और आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा

आर्य समाज और आर्य वीर दल पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा
21 से 27 दिसंबर तक वीरोत्सव मनाया जाएगा जिसके अंतर्गत देश के अमर हुतात्माओं को याद करते हुए श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी देते हुए ओम प्रकाश आर्य प्रधान आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने बताया कि इन 7 दिनों में आर्यसमाज के नेता स्वामी श्रद्धानन्द जी का 23 दिसम्बर को बलिदान हुआ व गुरु गोबिन्द सिंह जी का पूरा परिवार अपने धर्म के लिए बलिदान हो गया था।

माता गूजरी देवी ने भी ठन्डे बुर्ज में प्राण त्याग दिए । यह सप्ताह भारत के इतिहास में शौर्य का सप्ताह होता है। इससे प्राप्त ऊर्जा को क्रिसमस मानने के व्यय करना दुर्भाग्यपूर्ण है। आर्य समाज नई बाजार बस्ती में नवल किशोर चौधरी कोषाध्यक्ष भारत स्वाभिमान समिति बस्ती के सानिध्य में आयोजित यज्ञ में सम्मिलित लोगों ने वीर बलिदानियों को याद करते हुए उनके जीवन से धर्म पर दृढ़ रहने की प्रेरणा प्राप्त की।

इस अवसर पर ओम प्रकाश आर्य ने बताया कि इस वीरोत्सव सप्ताह के अंतर्गत पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्य समाज की संस्थाओं द्वारा यज्ञ और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर अमर बलिदानियों की जीवन गाथा बताई जाएगी। कहा कि यज्ञ अथवा अग्निहोत्र आज केवल धार्मिक कर्मकांड तक ही सीमित नहीं रह गया है। यह शोध और चिकित्सा का विषय भी बन गया है। प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्रों में इसे खूब आजमाया जा रहा है

क्योंकि इससे रोग पर तो काबू पाया ही जा रहा है साथ ही लोगों में सकारात्मक सोच और ऊर्जा का भी विकास होता है। प्रायोगिक परीक्षणों से पाया गया है कि वृष्टि, जल एवं वायु की शुद्धि, पर्यावरण संतुलन एवं रोग निवारण में यज्ञ की अहम भूमिका है। हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने वैज्ञानिक आधार पर शोध करके सामग्री व समिधाओं का चयन किया था। जैसे-बड़, पीपल, आम, बिल्व, पलाश, शमी, गूलर, अशोक, पारिजात, आंवला व मौलश्री वृक्षों के समिधाओं का घी सहित यज्ञ-हवन में विधान किया था, जो आज विज्ञान सम्मत है, क्योंकि यज्ञ का उद्देश्य पंचभूतों अर्थात् जिनसे संसार की सृष्टि हुई है। आकाश, वायु, अग्नि, जल, ओर पृथिवी की शुद्धि है,

जो हमारे पर्यावरण का अंग हैं। यज्ञ का वैदिक उद्देश्य भी पर्यावरण शुद्धि एवं संतुलन है। यज्ञ-विज्ञान का नियम है कि जब कोई पदार्थ अग्नि में डाला जाता है तो अग्नि उस पदार्थ के स्थूल रूप को तोड़कर सूक्ष्म बना देती है और उसके गुणों को कई गुणा बढ़ा देती है। जिस घर में हवन होता है, यज्ञाग्नि के प्रभाव से वहां की वायु गर्म होकर हल्की होकर फैलने लगती है और वहां कई दिनों तक समिधा की खुशबू विद्यमान रहती है।

नितेश कुमार और महिमा आर्य ने लोगों का आह्वान किया कि आज से ही हम सब नित्य यज्ञ करने का संकल्प लें और विशेष अवसरों पर बडे बडे सामूहिक यज्ञों का आयोजन करने का प्रयास करें । इस अवसर पर उपेन्द्र आर्य, धर्मेन्द्र कुमार, रिमझिम, राजेश्वरी, परी, महिमा, दृष्टि, पल्लवी, वैष्णवी, पुनीत, श्रेयांश, परी, विश्वनाथ सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
गरुण ध्वज पाण्डेय

Bindesh Yadav
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