कहा जा रहा है कि भाजपा ने दिखाने के लिए तैयार सामान पर तो जीएसटी घटा दी, लेकिन उसी सामान को बनाने वाले कच्चे माल पर जीएसटी बढ़ा दी। इसका सीधा असर कारोबारियों पर पड़ रहा है।
कारोबारी कहते हैं कि भाजपाई नेता तो मंच से 50% का भाषण देकर और सड़कों पर नारे लगाकर निकल जाते हैं… लेकिन असल में दुकानदार और ग्राहक आमने-सामने खड़े हो जाते हैं।
जब जनता बाजार में जाती है और सस्ता माल नहीं मिलता, तो नाराज़गी दुकानदार पर निकलती है। दुकानदार और ग्राहक के बीच की ये खटास सीधे तौर पर भाजपा की नीतियों का नतीजा बताई जा रही है।
कहा जा रहा है कि भाजपा सुधार नहीं कर रही, बल्कि ग्राहक और दुकानदार के रिश्तों को बिगाड़ रही है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा किसी की सगी नहीं है।
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