लाखों की लागत से बनी नहरें सूखी, साफ-सफाई तक नहीं – भानपुर के पचमोहिनी, बरगदवा , कनेथू बुजुर्ग गांवों में सूखे का संकट
बस्ती/भानपुर।सरकार भले ही किसानों की आय दोगुनी करने और खेतों तक पानी पहुंचाने के दावे कर रही हो, लेकिन बस्ती जिले के भानपुर क्षेत्र की जमीनी हकीकत इन दावों को नकारती नजर आ रही है।
क्षेत्र के पचमोहिनी,बरगदवा,कनेथू बुजुर्ग सहित दर्जनों ग्राम पंचायतों में नहरें वर्षों पहले करोड़ों रुपये की लागत से बनीं, लेकिन आज उन नहरों में न तो पानी है, न सफाई, और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी की निगाह।
सूखती फसलें, किसान परेशान लगातार दो सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी खत्म होती जा रही है।
धान की रोपाई में देरी हो रही है, और जिन किसानों ने पहले ही रोपाई कर दी है, उनकी फसलें मुरझाने लगी हैं। परंपरागत सिंचाई का मुख्य साधन नहरें होती थीं, लेकिन अब ये नहरें सिर्फ मिट्टी और कूड़े से पटी पड़ी हैं।
स्थानीय किसानों का कहना हैं –हर साल बरसात का इंतजार करते हैं, लेकिन नहरों से कभी कोई मदद नहीं मिलती। न कोई सफाई होती है, न कोई पानी आता है। फिर क्यों बनाई गईं ये नहरें?
लाखों खर्च, मगर नहरें सूखी सूत्रों के अनुसार, नहर विभाग द्वारा हर साल मेंटेनेंस, सफाई, मरम्मत और पानी आपूर्ति जैसे कार्यों के लिए लाखों रुपये स्वीकृत किए जाते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि भानपुर क्षेत्र की नहरें वर्षों से बिना सफाई के उपेक्षित पड़ी हैं।
कुछ स्थानों पर तो नहर का रास्ता ही अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है।नहर के किनारे पेड़ उग आए हैं, कुछ जगहों पर लोगों ने नहर की जमीन पर बाड़ बना ली है। जिम्मेदार अधिकारी कभी दौरा करने नहीं आते,” – एक स्थानीय पूर्व प्रधान ने बताया। पानी है ही नहीं, तो फसल कैसे बचे?
धान की फसल इस समय सबसे अधिक जल-आधारित होती है। बारिश की कमी को नहर से पूरा किया जा सकता था, लेकिन अब किसान या तो डीजल पंप से सिंचाई कर रहे हैं (जिसमें भारी खर्च आता है) या मजबूरी में फसल चौपट होते देख रहे हैं।
भानपुर तहसील के कई ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने विभाग से कई बार नहर में पानी छोड़ने की मांग की, लेकिन “जल उपलब्ध नहीं है” या “बजट की कमी है” कहकर टाल दिया जाता है।
सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा “हर खेत को पानी” और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसे प्रोजेक्ट पर जोर देने की बात कही जाती है। लेकिन यदि बस्ती जैसे जिलों में किसान बिना पानी के फसल उगा रहे हैं, तो यह योजनाएं सिर्फ फाइलों में ही साकार होती दिख रही हैं।
यदि हर साल करोड़ों की लागत से बनाई गई नहरें इसका जिम्मेदार कौन? विभाग, अधिकारी या सिस्टम?” – किसानों की मांग है कि नहरों की सफाई तत्काल कराई जाए नहरों में पानी छोड़ा जाए हर गांव की नहर की स्थिति की जांच हो पिछले वर्षों में मेंटेनेंस के खर्च की जांच कर कार्रवाई हो बस्ती जिले के भानपुर क्षेत्र की यह स्थिति केवल स्थानीय चिंता नहीं है,
बल्कि यह एक व्यापक प्रणालीगत भ्रष्टाचार, लापरवाही और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। अगर समय रहते ध्यान न दिया गया तो किसानों की फसलें बर्बाद होंगी, और यह संकट खाद्यान्न के स्तर पर भी असर डालेगा।















